October 19, 2026

ममता बनर्जी का बड़ा हमला — “अमित शाह बन सकते हैं सबसे बड़े मीर जाफर”, पीएम मोदी को दी सार्वजनिक चेतावनी

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र की सत्ता के शीर्ष पर सीधा निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने करीबी सहयोगी अमित शाह से सावधान रहने की सलाह दी है। कोलकाता हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान ममता ने कहा :  “मैं प्रधानमंत्री से कहूंगी, अमित शाह पर हमेशा भरोसा मत करो। एक दिन वह सबसे बड़े मीर जाफर साबित होंगे। थोड़ा सावधान रहें।”



टीएमसी सुप्रीमो के इस तीखे बयान से राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। ममता बनर्जी ने शाह की तुलना ऐतिहासिक विश्वासघाती चरित्र मीर जाफर से करते हुए आरोप लगाया कि गृह मंत्री लगातार प्रधानमंत्री के अधिकार क्षेत्र में दखल दे रहे हैं और “कार्यवाहक प्रधानमंत्री” की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

“शाह पर नहीं किया जा सकता भरोसा” — ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अमित शाह पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार का बदला लेने के लिए “राजनीतिक साजिशें” रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि शाह राज्य में मतदाता सूची से लगभग एक करोड़ नाम हटाने की योजना बना रहे हैं। “ये सब अमित शाह का काम है। उन्होंने अपने नेताओं से गुप्त बैठकें की हैं ताकि बंगाल के मतदाताओं को कमजोर किया जा सके,”
ममता ने कहा।

कटक हिंसा को लेकर केंद्र पर निशाना

ममता बनर्जी ने ओडिशा के कटक में 5 अक्टूबर को दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा के लिए भाजपा और बजरंग दल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा —  “कटक में हालात बहुत खराब हैं। भाजपा और बजरंग दल की वजह से वहां सांप्रदायिक हिंसा हुई है। ये लोग देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

उन्होंने केंद्र सरकार को “घमंडी और तानाशाही” करार देते हुए कहा कि उन्होंने ऐसी सरकार पहले कभी नहीं देखी।

पहले भी दे चुकी हैं विवादित बयान

यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी या अमित शाह पर इस तरह की तीखी टिप्पणी की हो।
29 मई को कोलकाता में उन्होंने कहा था —  “पीएम मोदी ऐसे बात करते हैं जैसे हर महिला के पति हों। वे अपनी पत्नी को सिंदूर क्यों नहीं देते?”

उनका यह बयान भी उस समय राजनीतिक विवाद का कारण बना था।
राजनीतिक विश्लेषण

ममता बनर्जी के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ते टकराव की अगली कड़ी मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि “मीर जाफर” जैसी ऐतिहासिक उपमा का प्रयोग भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार है, जो आने वाले महीनों में केंद्र-बंगाल संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है।

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