October 19, 2026

भारत में बाल विवाह में आई ऐतिहासिक कमी – 69% तक गिरे मामले, छत्तीसगढ़ ने भी दी मजबूत हिस्सेदारी

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मुंगेली । देशभर में बाल विवाह रोकथाम के लिए चलाए जा रहे सतत प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) की ताज़ा रिपोर्ट “टिपिंग प्वाइंट टू जीरो : एविडेंस टुवार्ड्स ए चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया” के मुताबिक भारत में बीते एक दशक में लड़कियों के बाल विवाह में 69 प्रतिशत और लड़कों के मामलों में 72 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि भारत के लिए वैश्विक स्तर पर एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

राज्यों का प्रदर्शन

रिपोर्ट के अनुसार असम ने बाल विवाह रोकने में सबसे बड़ी सफलता पाई है। यहां 84 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई है। वहीं महाराष्ट्र और बिहार में 70 प्रतिशत, राजस्थान में 66 प्रतिशत तथा कर्नाटक में 55 प्रतिशत मामलों में कमी आई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह गिरावट केवल जागरूकता से नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई, एफआईआर, गिरफ्तारियां और पंचायत स्तर पर निगरानी तंत्र की वजह से संभव हुई है।

छत्तीसगढ़ का योगदान

छत्तीसगढ़ भी इस अभियान में पीछे नहीं है। मुंगेली जिले में कृषक सहयोग संस्थान ने जिला प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों में 16 बाल विवाह रुकवाने में सफलता पाई है। संस्थान ने परिवारों से वचन पत्र भरवाकर बाल विवाह न करने की शपथ दिलाई और गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया।

संस्थान के निदेशक डॉ. एच.बी. सेन ने कहा –
“बाल विवाह के खिलाफ शिक्षा सबसे मजबूत हथियार है। कानून के साथ-साथ जनजागरूकता ही 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बना सकती है।”

सर्वे की प्रमुख बातें

99 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने कहा कि उन्हें बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के बारे में जानकारी मिली।

31 प्रतिशत गांवों में 6 से 18 वर्ष की सभी लड़कियां स्कूल जा रही हैं।

महाराष्ट्र – 51 प्रतिशत
बिहार – मात्र 9 प्रतिशत

91 प्रतिशत बाल विवाह के मामले गरीबी से जुड़े हुए पाए गए, वहीं 44 प्रतिशत मामलों का कारण लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बताई गई।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

जेआरसी के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत का कहना है –
“बाल विवाह रोकथाम के लिए रोकथाम (Prevention), सुरक्षा (Protection) और अभियोजन (Prosecution) – इन तीन स्तरों की रणनीति ने असर दिखाया है। यदि यही प्रयास जारी रहे तो भारत 2030 तक निश्चित रूप से बाल विवाह मुक्त देश बन जाएगा।”

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