राज्य की शराब नीति में परिवर्तन रमन सरकार ने किया था, भूपेश सरकार ने नहीं – कांग्रेस
रायपुर । प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य की आबकारी नीति में परिवर्तन तो रमन सरकार ने किया था। रमन सरकार के समय ही शराब का सरकारीकरण हुआ था। समाचार माध्यमों में कथित शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू की चार्जशीट की खबरें चल रही है कि कांग्रेस के मंत्रिमंडल ने राज्य की आबकारी नीति में परिवर्तन किया था यह गलत है, प्रदेश की आबकारी नीति में आमूलचूल परिवर्तन तो भाजपा की रमन सरकार के समय हुआ था। जो शराब दुकानें ठेकेदारों द्वारा चलाई जा रही थी उन दुकानों को रमन मंत्रिमंडल ने सरकार के द्वारा चलाने का फैसला लिया था।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ की रमन सिंह की ओर से 2017 में बनाई गई आबकारी नीति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। रमन सरकार के समय वर्ष 2017-18 में छत्तीसगढ़ की आबकारी से राजस्व प्राप्ति 3900 करोड़ रू. थी जो कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वर्ष 2019-20 में 6000 करोड़ रू. हो गयी। रमन सरकार की तुलना में राजस्व प्राप्ति दुगुनी हो गयी। इस प्रकार स्पष्ट हो रहा है कि रमन सरकार के समय सुनियोजित आबकारी घोटाला हो रहा था, जिससे सरकार के राजस्व में हानि हो रही थी। कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए भाजपा के इशारे पर ईडी और ईओडब्ल्यू ने घोटाले के मिथ्या आरोप लगाया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि रमन सरकार ने मदिरा के सेल प्राइज फिक्सेशन में देशी शराब के निविदाकर्ता/लाइसेंसी को वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में 60 प्रतिशत तथा वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक 50 प्रतिशत का मुनाफा प्रदान किया गया जो कि अन्य राज्यों से ढाई गुना अधिक था। सीएजी ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। रमन सरकार द्वारा देशी/विदेशी मदिरा के निविदाकर्ताओं को अत्यधिक मुनाफा दिए जाने के कारण वर्ष 2012-13 से 2016-17 के मध्य विदेशी शराब के रिटेलर्स को 946.79 करोड़ और इसी अवधि में देशी शराब के रिटेलर्स को 567.13 करोड़ का अवैध लाभ पहुंचाया गया। तत्कालीन आबकारी विभाग ने विभिन्न निविदाकर्ताओं/लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के साथ आपराधिक षड़यंत्र करते हुए विक्रय कर निर्धारण में कुछ निर्माताओं को फायदा पहुंचाने छत्तीसगढ़ राज्य के मदिरा की फुटकर बिक्री अनुज्ञापनों के व्यवस्थापन नियमों में दर्शित लाइसेंसी शर्तों में गलत परिवर्तन कर अवैध रूप से देशी/विदेशी मदिरा के फुटकर बिक्री मूल्य निर्धारण करने के दौरान वर्ष 2012-13 से 2016-17 के मध्य देशी/विदेशी मदिरा के फुटकर निविदाकर्ताओं को अधिक मुनाफा प्रतिशत प्रदान कर अनुचित लाभ प्रदान किया गया जिससे राज्य शासन का लगभग 4400 करोड़ रूपयों की आर्थिक क्षति हुई है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ईडी और ईओडब्ल्यू को कथित शराब घोटाले के जांच के दायरे को रमन सिंह के कार्यकाल की तीसरे टर्म को लाना चाहिए तब समझ आयेगा कि राज्य की शराब नीति में परिवर्तन किसने किया था और क्यों किया था? वर्तमान में की जा रही जांच तो राजनैतिक है, कांग्रेस को बदनाम करने की साजिश है।

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