मुंगेली में मानवता शर्मसार: मौत के बाद भी ‘गौमाता’ को नसीब नहीं सुकूँ, धधकती आग के बीच नगर पालिका साधे है मौन!
कचरा डंपिंग यार्ड में मिलीं मृत गायें, अधजले शव देखकर भड़का आक्रोश
नगर पालिका परिषद पर गंभीर लापरवाही का आरोप, गौसेवकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मुंगेली। शहर की नगर पालिका परिषद एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला गौमाता के सम्मान और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि नगर में मृत गायों का विधिवत अंतिम संस्कार कराने के बजाय उन्हें सीधे कचरा डंपिंग स्थल में फेंक दिया गया। इतना ही नहीं, कचरे में लगी आग के कारण कई गायों के शव अधजली अवस्था में पाए गए, जिन्हें पक्षियों द्वारा नोचते देखा गया। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद पूरे शहर में आक्रोश का माहौल है।
जानकारी के अनुसार नगर के डंपिंग यार्ड में करीब एक दर्जन मृत गायों के शव पड़े मिले। कचरे के ढेर में लगातार जल रही आग की वजह से कई शव बुरी तरह झुलस गए थे। मौके पर फैली दुर्गंध और वीभत्स दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का कहना है कि जिस गाय को हिंदू समाज में पूजनीय माना जाता है, उसके शवों के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है।
गौसेवकों ने जताई नाराजगी
घटना की जानकारी मिलते ही गौसेवा से जुड़े संगठन और गौप्रेमी मौके पर पहुंचे। उन्होंने नगर पालिका परिषद पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मृत गायों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। गौसेवकों का कहना है कि पहले मृत मवेशियों को गड्ढा खोदकर मिट्टी में दफनाया जाता था, लेकिन इस बार नियमों और संवेदनाओं दोनों की अनदेखी की गई है।
गौसेवकों ने मांग की है कि नगर में मृत गायों और मवेशियों के अंतिम संस्कार के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए तथा पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
“ये मुंगेली के लिए शर्मनाक स्थिति”
गौ सेवा धाम से जुड़े नानू ठाकुर ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुंगेली जैसे शहर में गौमाताओं के शवों को कचरे में फेंकना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हमारी गौ माताओं को बिना अंतिम संस्कार के कचरे में फेंक दिया गया है। ये किसी दूसरे देश का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले का हाल है। नगर पालिका ने न मिट्टी दी और न ही विधिवत अंतिम संस्कार कराया।” जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने आगे कहा कि नगर में करोड़ों रुपए स्विमिंग पूल, नदी सफाई और चौपाटी निर्माण जैसे कार्यों में खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गौमाताओं की सेवा और सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था नहीं है।
नानू ठाकुर ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि मृत गायों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार नहीं कराया गया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो गौ सेवा धाम उग्र आंदोलन करेगा।
धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ गई है। नागरिकों का कहना है कि गाय हिंदू धर्म में आस्था का प्रतीक है और इस तरह शवों को कचरे में फेंकना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। लोगों ने नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रशासन मृत पशुओं के सम्मानजनक अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है तो शहर की अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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