बिलासपुर) एक छोटी गलती और अपराधी बरी!” बिलासपुर रेंज में DNA सबूतों पर पुलिस अफसरों की हाईअलर्ट क्लास
हत्या, रेप और सनसनीखेज अपराधों की फाइलों में कई बार सबूत होने के बावजूद आरोपी कानून की गिरफ्त से बाहर निकल जाते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह बनती है जांच के दौरान की गई एक छोटी तकनीकी चूकज् यही खतरा अब बिलासपुर रेंज पुलिस ने गंभीरता से पकड़ लिया है।
मंगलवार को पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज का मीटिंग हॉल उस वक्त हाईटेक इन्वेस्टिगेशन सेंटर में बदल गया जब राम गोपाल गर्ग ने ष्ठहृ्र एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन और परीक्षण पर रेंज स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित कर पुलिस
अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि अपराधी अब सिर्फ बयान से नहीं, विज्ञान से पकड़े जाएंगे। कार्यशाला में हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में जब्त किए जाने वाले रक्त, लार, वीर्य, बालों की जड़, हड्डियां, दांत और टच ष्ठहृ्र जैसे साक्ष्यों की बारीकी से चर्चा हुई। अधिकारियों को बताया गया कि सैंपलिंग और जब्ती के दौरान की गई एक छोटी प्रक्रियात्मक गलती पूरी जांच को कमजोर कर देती है और अदालत में आरोपी को सीधा फायदा मिल जाता है
। क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला बिलासपुर की वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रियंका लकड़ा ने जब निर्भया केस, तंदूर मर्डर और श्रद्धा वाकर केस जैसे चर्चित मामलों का जिक्र किया तो स्क्रीन पर चल रही प्रस्तुति ने पूरे माहौल को गंभीर बना दिया। उन्होंने बताया कि इंसानी ष्ठहृ्र का 99.9 प्रतिशत हिस्सा समान होता है लेकिन बचा हुआ 0.1 प्रतिशत अपराधी की पहचान का सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। वहीं वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. स्वाति कुजूर ने न्यायालयिक जीव विज्ञान पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अपराध स्थल से जैविक नमूनों का सही संकलन ही न्याय की पहली सीढ़ी है।
उन्होंने साफ कहा कि नमी, ज्यादा तापमान और बैक्टीरिया कुछ ही घंटों में अहम ष्ठहृ्र साक्ष्य को नष्ट कर सकते हैं, इसलिए प्लास्टिक बैग की जगह कागज के बैग का इस्तेमाल और चेन ऑफ कस्टडी का पालन बेहद जरूरी है। कार्यशाला में मौजूद लगभग 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को भी सामने रखा, जिस पर वैज्ञानिक अधिकारियों ने मौके पर साक्ष्य संकलन, सैंपलिंग और जब्ती की तकनीकी समस्याओं का समाधान बताया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल और उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा की मौजूदगी रही। प्रशिक्षण के अंत में पुलिस महानिरीक्षक ने दोनों वैज्ञानिक अधिकारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और उम्मीद जताई कि अब अपराध विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों की गुणवत्ता और मजबूत होगी। बहरहाल, इस पूरी कार्यशाला ने एक बात फिर साबित कर दी कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, अगर सबूत सही तरीके से संभाले जाएं तो विज्ञान की अदालत में उसका बच निकलना लगभग नामुमकिन




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