October 19, 2026

बिलासपुर रेंज में हत्या के मामलों की विवेचना के लिए नई कार्ययोजना लागू: वैज्ञानिक साक्ष्यों से अपराधियों को मिलेगी कड़ी सजा

0
IMG_20260429_133742_496.webp


बिलासपुर | 28 अप्रैल, 2026
बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) रामगोपाल गर्ग ने गंभीर अपराधों, विशेषकर हत्या (Homicide) के मामलों में विवेचना के स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर, वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से न्यायालय में सजा की दर (Conviction Rate) को बढ़ाना है।


इस नई कार्यप्रणाली को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए आज एक रेंज स्तरीय वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। आईजी गर्ग ने स्वयं प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए पीपीटी (PPT) के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को विवेचना के महत्वपूर्ण बिंदुओं और त्रुटिहीन चार्जशीट तैयार करने के गुर सिखाए।


124 बिंदुओं की चेकलिस्ट और ‘ई-साक्ष्य’ अनिवार्य
आईजी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब से हत्या के हर प्रकरण की केस डायरी और चालान में 124 बिंदुओं वाली एक विशेष चेकलिस्ट का पालन करना अनिवार्य होगा। यह चेकलिस्ट एफआईआर से लेकर चार्जशीट फाइल करने तक की प्रक्रिया को कवर करती है, ताकि विवेचना में कोई भी मानवीय या तकनीकी त्रुटि न रहे और बचाव पक्ष को कानूनी खामियों का लाभ न मिल सके।


इसके अतिरिक्त, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत अब सभी प्रकार की जप्ती ‘ई-साक्ष्य’ (e-Sakshya) ऐप के माध्यम से वीडियोग्राफी करते हुए की जाएगी। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गवाहों के मुकर जाने की स्थिति में भी तकनीकी साक्ष्य न्यायालय में प्रभावी रहेंगे।
विवेचना के नए और कड़े मानक:


वैज्ञानिक क्राइम सीन मैनेजमेंट: घटनास्थल के ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व को देखते हुए क्षेत्र को तत्काल टेप से सील किया जाएगा। फोरेंसिक, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की उपस्थिति के बिना साक्ष्य संकलन नहीं होगा।


डिजिटल फुटप्रिंट पर जोर: अब विवेचक आरोपियों के गूगल टेकआउट (Google Takeout), इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स की बारीकी से जांच करेंगे। घटनास्थल के 100 किमी के दायरे में लगे कैमरों की मैपिंग ‘त्रिनयन ऐप’ के जरिए की जाएगी।


DNA और जैविक साक्ष्य: संघर्ष के दौरान मृतक के नाखूनों में फंसी आरोपी की स्किन या बालों के डीएनए ट्रेस करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी ताकि आरोपी की घटनास्थल पर उपस्थिति वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो सके।


साक्ष्यों की अटूट श्रृंखला (Chain of Custody): साक्ष्य संकलन से लेकर उसे मालखाने और एफएसएल (FSL) भेजने तक का पल-पल का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।


रात्रिकालीन पोस्टमार्टम: संवेदनशील मामलों में पर्याप्त रोशनी में रात में भी पोस्टमार्टम कराया जा सकेगा, जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।
अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था प्रभावी


आईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद होने वाले सभी हत्या के प्रकरणों की विवेचना इन्हीं वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत की जाए। सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रविष्टि से लेकर साइबर साक्ष्यों (CDR, IPDR, IMEI) के संकलन तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और पेशेवर होगी।


आज के इस वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र में मुंगेली एसएसपी भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) से लेकर उपनिरीक्षक (SI) स्तर के अधिकारी शामिल हुए। आईजी गर्ग ने घोषणा की है कि पुलिस अधिकारियों को नवीनतम अनुसंधान तकनीकों से अपग्रेड करने के लिए प्रति सप्ताह अलग-अलग विषयों पर ऐसे प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed