मवेशी बाजार ठेका की तृतीय नीलामी भी रही असफल, कम बोली के चलते प्रक्रिया स्थगित
लगातार तीसरी बार विफल नीलामी से नगर पालिका पर उठे सवाल, अव्यवस्थाओं से व्यापारी-पशुपालक परेशान
मुंगेली। नगर पालिका परिषद मुंगेली में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मवेशी बाजार पशु पंजीयन शुल्क वसूली ठेके की तृतीय नीलामी भी असफल रही। मंगलवार 7 अप्रैल को आयोजित नीलामी प्रक्रिया में शासकीय निर्धारित दर से कम बोली मिलने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। लगातार तीसरी बार नीलामी रद्द होने से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
नीलामी प्रक्रिया नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला और मुख्य नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर की उपस्थिति में संपन्न हुई। इस दौरान पार्षद रोशन सोनी, सूरज यादव, नारद देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नीलामी में अनिल तंबोली, अरविंद श्रीवास, कामेंद्र साहू, लक्ष्मी प्रसाद छेदईया, राजेश, सत्तू ठाकुर, आयुष शुक्ला एवं प्रहलाद यादव जैसे बोलीदाता शामिल हुए, लेकिन किसी की भी बोली शासन द्वारा तय न्यूनतम दर तक नहीं पहुंच सकी।
शर्तों पर अटकी प्रक्रिया, नहीं बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार नीलामी में करीब 33 लाख 67 हजार रुपये की बोली लगी थी, जबकि अनुबंध राशि मिलाकर कुल लगभग 38 लाख रुपये तय हुए थे। नियमानुसार बोलीदाता को तत्काल करीब 19 लाख रुपये जमा करना था, साथ ही लगभग 2 लाख 37 हजार रुपये की किस्त निर्धारित थी। इन कड़ी शर्तों पर सहमति नहीं बनने के कारण प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा।
7 दिनों से नगर पालिका स्वयं कर रही संचालन
नीलामी रद्द होने के बाद पिछले 7 दिनों से मवेशी बाजार का संचालन नगर पालिका परिषद स्वयं कर रही है। वर्तमान में बकरी-बकरा के लिए 60 रुपये प्रति रसीद और भैंस के लिए 500 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। हालांकि यह व्यवस्था अस्थायी होने के कारण सुचारू संचालन में कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव, बढ़ी परेशानी
मवेशी बाजार में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव देखा जा रहा है। न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही बैठने की सुविधा उपलब्ध है। भीषण गर्मी में दूर-दराज से आने वाले पशुपालक और व्यापारी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अव्यवस्थाओं के कारण बाजार की रौनक भी प्रभावित हो रही है।
राजस्व पर असर, प्रशासन पर सवाल
लगातार नीलामी विफल होने से नगर पालिका को संभावित राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। वहीं अस्थायी संचालन के कारण व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकला तो बाजार की स्थिति और खराब हो सकती है।
सूत्रों का दावा—कड़ी शर्तें बनी बाधा
सूत्रों का कहना है कि नीलामी की सख्त शर्तें ही प्रक्रिया विफल होने की मुख्य वजह हैं। भारी अग्रिम राशि और किस्तों की जटिल संरचना के चलते इच्छुक ठेकेदार पीछे हट रहे हैं।
अब परिषद के निर्णय पर टिकी निगाहें
नगर पालिका परिषद ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही नीलामी को लेकर नई रणनीति बनाई जाएगी। नई तिथि घोषित कर पुनः नीलामी कराई जा सकती है या फिर अन्य वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
फिलहाल, मवेशी बाजार की लगातार विफल नीलामी और अव्यवस्थित संचालन नगर पालिका परिषद की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है, वहीं व्यापारी और पशुपालक समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


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