October 19, 2026

नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के ‘प्रॉक्सी सिस्टम’ पर सख्त रोक
रिश्तेदार अब नहीं बन सकेंगे लायजन पर्सन, सभी आयुक्तों–CMO को आदेश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में वर्षों से चली आ रही ‘प्रॉक्सी व्यवस्था’ पर अब पूरी तरह से ब्रेक लगने जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि महिला महापौर, अध्यक्ष, सभापति या पार्षदों के पति, पुत्र, भाई या अन्य रिश्तेदार अब किसी भी स्थिति में उनके प्रतिनिधि, प्रॉक्सी या लायजन पर्सन के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे।

विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी नगर निगम आयुक्तों, नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को निर्देश भेज दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि ऐसी किसी भी नियुक्ति को अमान्य माना जाएगा और भविष्य में इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।


रिश्तेदारों की जानकारी देने प्रोफार्मा जारी : नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को एक विस्तृत प्रोफार्मा भेजा है। इसके तहत निकायों से यह जानकारी मांगी गई है कि—

किस जिले और किस नगरीय निकाय में सांसद या विधायक द्वारा प्रतिनिधि नियुक्त किए गए हैं,

नियुक्त प्रतिनिधि का नाम क्या है,

क्या वह किसी निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि का रिश्तेदार है,

यदि हां, तो संबंधित महिला जनप्रतिनिधि का नाम और पद क्या है।

इस जानकारी के आधार पर राज्य स्तर पर स्थिति की समीक्षा की जाएगी और नियमों के उल्लंघन की दशा में कार्रवाई की जाएगी।

मानवाधिकार आयोग की आपत्ति बनी कारण : यह सख्त कदम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की आपत्ति के बाद उठाया गया है। आयोग ने नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके रिश्तेदारों द्वारा निर्णय लेने और प्रशासनिक दखल को भारतीय संविधान की भावना के विपरीत बताया था। आयोग ने इसे महिला सशक्तिकरण के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।


2010 का आदेश भी रहा बेअसर : गौरतलब है कि वर्ष 2010 में भी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इसी तरह का आदेश जारी किया गया था। उस समय स्पष्ट किया गया था कि—

महिला पदाधिकारियों के रिश्तेदार बैठकों में शामिल नहीं होंगे,

वे किसी प्रकार के निर्णय नहीं ले सकेंगे,

न ही अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देने का अधिकार होगा।


हालांकि, उस आदेश का जमीनी स्तर पर प्रभावी पालन नहीं हो सका। अब मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस बार आदेश को पूरी कठोरता के साथ लागू कराया जाएगा।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

सरकार के इस फैसले को नगरीय निकायों में वास्तविक महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे न केवल निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका सुनिश्चित होगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। अब यह स्पष्ट है कि नगरीय निकायों में सत्ता और निर्णय का केंद्र वही महिला जनप्रतिनिधि होंगी, जिन्हें जनता ने चुना है — न कि उनके परिजन।

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