October 18, 2026

90 वर्षीय बुजुर्ग महिला का सिम्स में सफल कूल्हा प्रत्यारोपण

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जटिल सर्जरी के बाद अगले ही दिन पैरों पर खड़ी हुई मरीज

बिलासपुर। आयु कोई बाधा नहीं होती, यदि उपचार आधुनिक तकनीक और अनुभवी चिकित्सकों के हाथों हो—इस बात को सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) के अस्थि रोग विभाग ने एक बार फिर साबित कर दिया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 90 वर्षीय इंडिया बाई के बाएं कूल्हे की हड्डी बुरी तरह टूट गई थी। परिजनों द्वारा उन्हें गंभीर अवस्था में सिम्स लाया गया, जहां जटिल सर्जरी कर उन्हें नया जीवन दिया गया।

अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ने बताया कि अधिक उम्र में कूल्हे की हड्डी का फ्रैक्चर सामान्य तरीके से जुड़ पाना बेहद कठिन होता है। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ता है, जिससे संक्रमण, फेफड़ों की समस्या, कमजोरी और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

उन्नत तकनीक से किया गया कूल्हा प्रत्यारोपण

मरीज की उम्र और स्थिति को देखते हुए अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. बेन के मार्गदर्शन में चिकित्सकों की टीम ने लंबे स्टेम वाले मॉड्यूलर बाइपोलर कृत्रिम कूल्हा प्रत्यारोपण की उन्नत तकनीक अपनाई। इसके साथ ही टीबीडब्ल्यू तकनीक एवं हड्डी को मजबूती देने के लिए एन्क्लेज वायरिंग का उपयोग किया गया। जटिल ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।

सर्जरी के अगले ही दिन चलने लगी मरीज

ऑपरेशन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह रहा कि सर्जरी के अगले ही दिन 90 वर्षीय मरीज अपने पैरों पर खड़ी होकर चलने लगी, जो इस आयु वर्ग में एक बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि मानी जा रही है।

टीमवर्क से मिली सफलता

इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम की भूमिका भी अहम रही। वहीं नर्सिंग इंचार्ज योगेश्वरी सिस्टर ने ऑपरेशन से पहले और बाद में मरीज की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सर्जरी हेतु आवश्यक विशेष इम्प्लांट की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एवं डीन डॉ. रमणेश मूर्ति का विशेष सहयोग रहा।

सिम्स की चिकित्सा क्षमता का उदाहरण

अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स में आधुनिक तकनीक, बेहतर संसाधन और अनुभवी चिकित्सकों की टीम के समन्वय से जटिल से जटिल सर्जरी संभव हो रही है। इससे बुजुर्ग मरीजों को भी नई जीवनशक्ति मिल रही है।

वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को समय पर उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराना सिम्स की प्राथमिकता है। इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर संस्थान की चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और टीमवर्क को प्रमाणित किया है।


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