October 20, 2026

छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मियों का भविष्य अधर में

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नियमितीकरण व एचआर पॉलिसी की मांग पर फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

रायपुर । छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता में घिर गया है। वर्षों से लंबित मांगों—नियमितीकरण, ग्राम रोजगार सहायकों के ग्रेड पे निर्धारण तथा 18 माह से लंबित मानव संसाधन (HR) नीति को तत्काल लागू करने—को लेकर छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।

रविवार को रायपुर स्थित शादाणी दरबार में आयोजित महासंघ की प्रांतीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में महासंघ के प्रांतीय पदाधिकारी, जिला व ब्लॉक स्तर के अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे।

20 साल की सेवा, फिर भी सुरक्षा नहीं

महासंघ का कहना है कि मनरेगा योजना में 20 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे कर्मी आज भी सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। सरकार के गठन के बाद मांगों के निराकरण हेतु समिति गठित की गई थी, जिसे 15 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं होने से कर्मियों में असंतोष बढ़ता गया है।

केंद्र से भी मिला था आश्वासन

हाल ही में देशभर के कर्मचारी संघों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ शासन से कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण के संबंध में चर्चा कर पहल करने का आश्वासन दिया था। इस आश्वासन से राज्य के मनरेगा कर्मियों को उम्मीद जगी थी, जिसकी जानकारी उपमुख्यमंत्री व पंचायत मंत्री को भी दी गई थी।

प्रशासन का पक्ष

उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री श्री विजय शर्मा ने मनरेगा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए 18 माह से लंबित मामलों में आयुक्त, महात्मा गांधी नरेगा को मानव संसाधन नीति पर शीघ्र कार्यवाही के निर्देश देने की बात कही थी। वहीं, आयुक्त मनरेगा द्वारा 3 जनवरी 2026 को एक माह के भीतर HR पॉलिसी लागू करने का आश्वासन भी दिया गया था।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नीति के मसौदे पर प्रक्रियागत व तकनीकी पहलुओं की समीक्षा चल रही है और वित्तीय स्वीकृति से जुड़े बिंदुओं पर समन्वय किया जा रहा है। शासन का कहना है कि कर्मियों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी और समाधान के लिए प्रयास जारी हैं।

आंदोलन की रणनीति

महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण, नियमितीकरण की प्रक्रिया तथा सेवा व सामाजिक सुरक्षा के प्रावधानों के साथ HR नीति लागू नहीं की जाती, तो इसी माह से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। साथ ही ‘विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ को भी मांगें पूरी होने तक जमीनी स्तर पर क्रियान्वित नहीं करने का निर्णय लिया गया है।

ग्रामीण रोजगार पर असर की आशंका

मनरेगा कर्मियों की हड़ताल की घोषणा से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्धता और योजना के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन की अगली पहल पर टिकी हैं कि क्या समय रहते समाधान निकलता है या राज्य को बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।

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