October 19, 2026

विश्व स्ट्रोक दिवस पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर में स्ट्रोक व प्रकार एवं उसकी पहचान के लिए जागरूक करते हुए समय पर उपचार को ही, जीवन की रक्षा बतलाया गया

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स्ट्रोक के लक्षणों की समय पर पहचान से बच सकती है जान- डां. मनीष बंजारा

मुंगेली- विश्व स्ट्रोक दिवस पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पदमपुर में 62 लोगो की प्राथमिक चिकित्सा कर स्ट्रोक के विषय में जानकारी देते हुए बताया गया कि स्ट्रोक क्या है, स्ट्रोक के प्रकार, स्ट्रोक के शुरूवाती लक्षणों की पहचान व स्ट्रोक की पहचान की उपरांत इसके लिए बी-ई-फास्ट सूत्र की जानकारी देते हुए। स्ट्रोक के प्रभाव को कंट्रोल करने के लिए गुर बताये गये। इसके साथ ही तुरंत चिकित्सा से जीवन बचाव की दिशा में कार्य करने की सलाह देते हुए लोगो को जागरूक किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शीला शाहा एवं डीपीएम गिरिश कुर्रे, डां. कमलेश खैरवार के निर्देशानुसार विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्ट्रोक जागरूकता कार्यक्रम किया गया।

        डां. मनीष बंजारा ने बताया कि अनहेल्दी लाईफ स्टाईल के चलते 30 से 50 वर्ष के आयु के युवाओं में इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिससे स्ट्रोक एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। देश में हर साल 18 लाख लोग इसके शिकार हो रहे है। जो जागरूकता की कमी के कारण स्ट्रोक के शिकार हो जाते है और इसके पीछे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्वस्थ्य जीवन शैली ही प्रमुख कारण है। 

जानिए स्ट्रोक क्या है-
जब मस्तिष्क की रक्तवाहिनी में रूकावट हो या फटने से दिमाग में रक्त की आपूर्ति व प्रवाह बाधित हो जाती है। प्रवाह में रूकावट आने पर मस्तिष्क के कोशिका न्यूराॅन्स को आॅक्सीजन नहीं मिल पाती जिससे वह मरने लगती है। दिमाग के नस फटने से आंतरिक ब्लीडिंग होती है यह दोनो विधियां जानलेवा होती है।  

स्ट्रोक को कैसे पहचाने?
       अगर किसी व्यक्ति को स्ट्रोक हुआ है तो इसके शुरुआती लक्षण चेहरे पर और चेहरे के आसपास के अंगों में नजर आते हैं। इससे चेहरे का एक हिस्सा सुन्न पड़ सकता है और उस हिस्से पर कंट्रोल खत्म हो सकता है। भ्रम की स्थिति बन सकती है, बोलने में मुश्किल हो सकती है। आपको लग सकता है कि जैसे जीभ आपके कंट्रोल में नहीं है। अचानक एक या दोनों आंखों में धुंधलापन हो सकता है। कई बार चक्कर आने लगते हैं और चलने में मुश्किल होने लगती है। यह लक्षण स्ट्रोक की ओर इंगित करता है।


स्ट्रोक के प्रमुख प्रकार-
इस्केमिक स्ट्रोक- स्ट्रोक के मामले में लगभग 80 प्रतिशत मामलों में इस्केमिक स्ट्रोक ही होता है। जिससे रक्त वाहिनियों में थक्का जमने से दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती फलस्व रूप मस्तिष्क की कोशिकाए मर जाती है। 

मिनी स्ट्रोक –  इसमें कुछ समय के लिए रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। जो स्ट्रोक का चेतावनी संकेत है। इसे गंभीरता से लेकर उपचार के लिए जुट जाना चाहिए।

हेमरेजिक स्ट्रोक- इसमें दिमाग की नस फटने से आंतरिक ब्लीडिंग होती है, जो जानलेवा हो सकती है।

गोल्डन आवर- स्ट्रोक आने के शुरूवाती लक्षण की पहचान के पश्चात 4 घंटे के भीतर ईलाज अत्यंत आवश्यक होता है इस अवधि को गोल्डन आवर कहते है। 

इस वर्ष की थीम- स्ट्रोक के लक्षणों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार, जीवन की रक्षा करना है।

स्ट्रोक से बचाव –
     स्ट्रोक के किसी भी लक्षण का आभास होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह ले और उनके मार्गदर्शन के अनुसार कार्य करे। इसके साथ ही जीवनशैली में बदलाव, जैसे स्वस्थ आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, धूम्रपान और शराब छोड़ना, और वजन नियंत्रित रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्वास्थ्य स्थितियों को नियंत्रित करना और नियमित चिकित्सा जांच कराना भी आवश्यक है।

         इस अवसर पर सीमा पहारी, मिथलेश राठौर, सुनीता मिरी, किशोर उईके, संतोष बघेल, मोनिका, त्रिवेणी, जलेश्वरी मिरी, सुधा गंधर्व एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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