नगर पालिका मुंगेली की ‘कागज़ी स्वच्छता’ पर सवाल — ज़मीनी हक़ीकत में बदबू, कचरा और लापरवाही का आलम
मुंगेली । स्वच्छता और नगर पालिका मुंगेली का रिश्ता हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। बीते दिनों नगर पालिका परिषद मुंगेली ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में 20 हजार से 50 हजार की आबादी वाले शहरों में राष्ट्रीय स्तर पर 9वां स्थान प्राप्त कर जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश में नाम रौशन किया था। इस उपलब्धि को बड़ी सफलता के रूप में प्रचारित किया गया। कलेक्टर ने नगरवासियों के सहयोग और पालिका टीम के बेहतर प्रबंधन को इस उपलब्धि का श्रेय देते हुए बधाई दी थी। परंतु जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कागज़ों और रिपोर्टों में भले ही नगर स्वच्छ और चमकता हुआ दिखाई देता हो, मगर वास्तविकता में वार्डों की गलियां, नालियां और सड़कों की हालत दयनीय बनी हुई है। शहर के लगभग हर वार्ड में कचरे के ढेर, बजबजाती नालियां और फैली दुर्गंध ने नगर की ‘कागज़ी स्वच्छता’ की पोल खोल दी है।
कागज़ों में स्वच्छता, ज़मीनी स्तर पर बदबू : स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में प्रदेश के 169 शहरों में मुंगेली ने 20वां स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2023 में यह स्थान 336वां था, यानी नगर ने 317 स्थानों की बड़ी छलांग लगाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में आयोजित ‘स्वच्छता संगम 2025’ कार्यक्रम में नगर पालिका मुंगेली को इस पुरस्कार से सम्मानित किया। लेकिन नगरवासियों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल कागज़ी आंकड़ों और फोटोग्राफ़ी पर आधारित है।
वार्डों में कचरे और गंदगी का साम्राज्य : नगर के मुख्य वार्डों में स्थिति चिंताजनक है। दाउपारा चौक, गोलबाजार पड़ाव चौक, गायत्री मंदिर मार्ग और मल्हापारा इलाक़े में नालियों से निकलता गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। जगह-जगह कचरे के ढेर बदबू फैला रहे हैं।
काली माई वार्ड के एक सरकारी कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया — “नाली से निकलने वाली बदबू से जीना मुश्किल हो गया है। कई बार वार्ड पार्षद को शिकायत की गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। सफाई कर्मी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं।”
इसी तरह महाराणा प्रताप वार्ड के निवासियों ने स्वच्छता को लेकर जनदर्शन में आवेदन दिया, लेकिन महीनों बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दीनदयाल वार्ड में नालियों की सफाई न होने से लोगों में आक्रोश है। नागरिकों ने अपने वार्ड पार्षदों को “निष्क्रिय” तक कह दिया है।
नगरवासियों का आक्रोश : शहर के कई वार्डों के निवासी बताते हैं कि पालिका कर्मचारी समय पर सफाई नहीं करते। नालियों की सफाई में लापरवाही बरती जाती है और कई जगहों पर महीनों तक गंदगी जस की तस बनी रहती है। कचरा वाहन कभी-कभी आता है, तो कई बार दिनों तक नहीं दिखाई देता। वार्डों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
पालिका प्रशासन के बचाव में सफाई
मुख्य नगरपालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर ने सफाई व्यवस्था पर सफाई देते हुए कहा — “सफाई व्यवस्था एक सतत प्रक्रिया है। जिन स्थानों पर समस्या उत्पन्न हुई होगी, वहां की सफाई जल्द कराई जाएगी। जनता से भी सहयोग की अपेक्षा है।”

नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने गंदगी और नालियों की सफाई को लेकर अजीबो-गरीब तर्क दिया। उन्होंने कहा — “नाली से निकले कचरे को तुरंत नहीं उठाया जाता। उसे एक दिन तक सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, फिर दूसरे दिन उठाया जाता है। कर्मचारियों की कमी के कारण कुछ स्थानों में देरी हो जाती है। इस विषय में कलेक्टर को अवगत कराया गया है ।”
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और उपाध्यक्ष की अनुपलब्धता : नगर पालिका उपाध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा से इस विषय पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। पत्रकारों के कॉल तक का जवाब नहीं देने वाले जनप्रतिनिधियों से आम जनता की शिकायतें सुनी जाएंगी या नहीं, यह सवाल नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगरवासियों की मांग — ‘कागज़ी स्वच्छता नहीं, वास्तविक सुधार चाहिए’ नगर के लोगों का कहना है कि सिर्फ पुरस्कारों और फोटो सेशन से नगर साफ नहीं होगा। वार्डवार सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जाए, नियमित निरीक्षण हो, और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
कई नागरिकों ने यह भी कहा कि यदि नगर पालिका ने जल्द सुधार नहीं किया तो वे सामूहिक रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे।


The News Related To The News Engaged In The Hasdeo Pravah Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
