October 20, 2026

झारखंड सरकार ने तीन कफ सिरप पर लगाया तत्काल प्रतिबंध — बच्चों की मौत के बाद बड़ा फैसला

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रांची । झारखंड सरकार ने राज्य में तीन कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई उन चिंताजनक रिपोर्ट्स के बाद की गई है, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में संदिग्ध कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई थी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय, नामकुम (रांची) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोल्ड्रेफ, रेपीफ्रेश टीआर और रिलाइफ सिरप — इन तीनों कफ सिरप में डायइथाइलीन ग्लाइकॉल की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है। इस रासायनिक तत्व का अत्यधिक सेवन मानव शरीर के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

निदेशालय ने सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन सिरप की बिक्री, वितरण और उपयोग पर कड़ी निगरानी रखें। साथ ही मेडिकल दुकानों और अस्पतालों में निरीक्षण अभियान चलाकर नमूने लिए जाएं और नियमों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

झारखंड सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे इन तीनों सिरप का किसी भी स्थिति में उपयोग न करें। यदि घर में उपलब्ध हों, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दें या नजदीकी औषधि नियंत्रण अधिकारी को सूचना दें।

सरकार का यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से एक सावधानीपूर्ण और सख्त कदम माना जा रहा है।

इसी क्रम में मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई घटनाओं के बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों ने भी एडवाइजरी जारी कर संदिग्ध कफ सिरप के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले 5 अक्टूबर को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की थी। बैठक में औषधि गुणवत्ता मानकों के पालन और बच्चों में कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग पर बल दिया गया।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के निर्देशानुसार आयोजित इस बैठक में तीन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई —
1️⃣ औषधि निर्माण इकाइयों में गुणवत्ता मानकों और अनुसूची ‘एम’ के प्रावधानों का कड़ाई से पालन।
2️⃣ बच्चों में कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना और अतार्किक संयोजनों से परहेज।
3️⃣ खुदरा फार्मेसियों के विनियमन को सुदृढ़ कर अनुचित दवा बिक्री पर रोक लगाना।
सरकार का यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह औषधि गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को और सशक्त बनाने की दिशा में भी एक ठोस कदम माना जा रहा है।

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