श्रद्धेय शांताराम जी को श्रद्धांजलि : निष्काम सेवा भाव का उत्कृष्ट उदाहरण -रूपनारायण सिन्हा
बैतलपुर् -वरिष्ठ प्रचारक एवं हम सबके मार्गदर्शक श्रद्धेय शांताराम जी का संपूर्ण जीवन एक निष्काम योगी की भांति समाज सेवा और संगठन को समर्पित रहा। उनका स्वभाव सदैव समाज को संगठित करने और प्रत्येक वर्ग की चिंता करने वाला था। उन्होंने श्री हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप मदकू के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव को पुनः स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए। इसके साथ ही चंदरपुर कुष्ठ बस्ती के प्रति उनकी गहन संवेदना, नवागढ़ के प्राचीन गणेश मंदिर के जीर्णोद्धार में उनकी सहभागिता, ओडगन स्थित श्रीराम मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रकल्प में उनका योगदान तथा विभिन्न ग्रामों में उनकी प्रेरणा से आयोजित चिकित्सा शिविर एवं नेत्र शिविर, “नर सेवा नारायण सेवा” की जीवंत उदाहरण है। उक्त बातें योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा जी के द्वारा
श्रद्धेय शांताराम जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं शांति भोज कार्यक्रम में कही।अपने उद्बोधन में उन्होंने शांताराम जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि—”उनके विचार और कार्य समाज के लिए प्रेरणा के अक्षय स्रोत हैं। उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात कर आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
उक्त श्रद्धांजलि सभा श्री हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप सेवा समिति, मदकू के तत्वावधान में सरस्वती शिशु मंदिर, बैतलपुर के प्रांगण में आयोजित की गई। आयोजन में चंद्रखुरी, चंदरपुर, बैतलपुर, दरूवनकांपा, मदकू, ठेलकी, बासीन, बडियाडीह सहित आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने सम्मिलित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उक्त कार्यक्रम के पूर्व 11 बजे से शिवनाथ नदी के तट पर शांताराम जी एवं सेना, पुलिस एवं अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के निमित्त पुरे विधि विधान से श्राद्ध, तर्पण किया गया। पश्चात सायं 3 से सरस्वती शिशु मंदिर बैतलपुर में श्रद्धांजलि सभा एवं शांति भोज का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर डॉ. हेडगेवार जन्म शताब्दी समारोह समिति, रायपुर के सौजन्य से निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन भी किया गया। इसमें ग्रामीणजन बड़ी संख्या में पहुँचे और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में श्री हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप सेवा समिति, मदकू के पदाधिकारी, सदस्यगण तथा सरस्वती शिशु मंदिर, बैतलपुर के आचार्य-आचार्या की विशेष भूमिका रही।
श्रद्धेय शांताराम जी का जीवन समाज सेवा, संगठन और त्याग का प्रतीक था। उनकी स्मृति आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

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