“कार्यक्रमों के नाम पर जबरन वसूली… जेबें भरने नई चाल”
रायपुर/मुंगेली। हाल ही में आयोजित एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम ने जिले में हलचल मचा दी है। इस आयोजन के लिए स्थानीय व्यापारियों और अधिकारियों पर चंदा देने का दबाव बनाया जा रहा है। राजनीतिक चंदाखोरी की इस प्रवृत्ति से व्यापारी वर्ग और प्रशासनिक अधिकारी गहरी चिंता और तनाव में हैं।
सूत्रों के अनुसार आयोजन की तैयारियों में जुटे कुछ नेताओं को व्यापारी व अधिकारी अपनी क्षमता अनुसार सहयोग राशि प्रदान कर रहे थे। लेकिन इसके बाद भी उच्च स्तर के राजनीतिक नेतृत्व ने इसे दबाव और वसूली का साधन बना लिया। बड़े व्यापारियों और अधिकारियों को लगातार फोन कर भारी रकम देने की मांग की जा रही है। स्थिति यह है कि यदि कोई सहयोग करने में असमर्थता जताता है, तो उसे राजनीतिक प्रभाव और नुकसान का डर दिखाया जाता है।
व्यापारी और अधिकारी आमतौर पर राजनीति से दूर रहकर अपने कामकाज और दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं। वे किसी भी पार्टी या नेता से सीधा टकराव नहीं चाहते। लेकिन चंदाखोरी के इस दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। जिले के प्रमुख व्यापारी संगठनों में भी इस मुद्दे पर नाराजगी है। उनका कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के बहाने इस तरह की वसूली से न केवल व्यवसाय प्रभावित होता है बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण भी बनता है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर जिलेभर में चर्चा तेज है। आमजन का कहना है कि राजनीति सेवा और विकास का माध्यम होना चाहिए, न कि जबरन वसूली का। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कार्यक्रमों के नाम पर इस तरह की चंदाखोरी कब तक चलेगी। व्यापारी और अधिकारी वर्ग अब प्रशासन एवं उच्च नेतृत्व से राहत की उम्मीद कर रहा है।

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