October 19, 2026

मुंगेली पुलिस का ‘पहल’ अभियान – नशे की दलदल से युवाओं को बाहर निकालने के लिए कार्यशाला

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• ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं और अभिभावकों को किया जागरूक

मुंगेली। पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल के निर्देशन में जिले में नशामुक्त समाज की दिशा में अभियान “पहल” के तहत युवाओं और उनके अभिभावकों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य नाबालिग और युवा पीढ़ी को सुखा नशे जैसे ब्राउन शुगर, चरस, गांजा, अफीम और नाइट्रा से दूर रखना और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना था।

कार्यशाला का नाम “तमसो मा ज्योतिर्गमय” रखा गया, जिसका अर्थ है अंधकार को छोड़कर प्रकाश की ओर जाना, यानी बुराई छोड़कर अच्छाई अपनाना। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने युवाओं और बच्चों को उनके परिजनों के समक्ष समझाया कि नशा न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जीवन और भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

कार्यशाला में विशेष रूप से बताया गया कि नशे में फंसे युवा छोटे-मोटे अपराध करने लगते हैं और अवैध कारोबारों में संलिप्त हो सकते हैं। उन्होंने युवाओं को नशा छोड़कर बेहतर भविष्य बनाने और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।

परिजनों को दी गई सलाह:

बच्चों और युवाओं की गतिविधियों पर ध्यान रखें।

मित्र मंडली और उनके प्रभाव को समझें।

रात में बच्चों को बिना देख-रेख बाहर न भेजें।

बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर निगरानी रखें।

अगर बच्चे नशे की चपेट में हैं, तो पुलिस या स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।

पुलिस अधीक्षक ने चेतावनी दी कि जिले में अवैध नशा कारोबार और सेवन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस टीम लगातार ऐसे मामलों पर नजर रख रही है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कार्यशाला में उपस्थित अधिकारी:

पुलिस अनुविभागीय अधिकारी मुंगेली मयंक तिवारी,उप पुलिस अधीक्षक नवनीत पाटिल,निरीक्षक प्रसाद सिन्हा,उप निरीक्षक सुशील बंछोर,पुलिस स्टाफ साथ ही नशे में लिप्त युवा और उनके परिजन भी उपस्थित थे।
अभियान का उद्देश्य:
मुंगेली पुलिस का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना नहीं है, बल्कि जिले में नशे के खिलाफ जन आंदोलन को मजबूत करना है। अभियान के तहत पुलिस लगातार अवैध नशा करने वालों पर नजर रख रही है और यदि कोई जानकारी प्राप्त होती है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

इस कार्यशाला के माध्यम से पुलिस ने युवाओं को प्रेरित किया कि वे नशे की दलदल से बाहर निकलें और समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनें।

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