November 4, 2026

वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत स्टेडियम में सजा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अनूठा मंच, पंथी नृत्य और काव्यात्मक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव: मुंगेली में लोककला और सांस्कृतिक विरासत की धूम, कलाकारों ने बांधा समां

मुंगेली, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समा बांध दिया। लोकगीत, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियों से पूरा परिसर छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों में सराबोर हो उठा। प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और उन्हें प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। राज्योत्सव में वीर रस की राष्ट्रीय कवयित्री अन्नपूर्णा पवार आहुति ने अपनी संगीतमय काव्यात्मक प्रस्तुति दी। संगीत की धुन पर मोर छत्तीसगढ़ महतारी गीत से दर्शक झूम उठे एवं अन्य काव्य प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया। इसमें गिटार पर उनके साथ बलोदा बाजार से ही आई साखी साहू तथा ढोलक व तबले पर संजू चक्रधारी संगत कर रहे थे।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गायक नितिन दुबे ने अपने लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उनके सुरीले गीतों पर दर्शक झूम उठे और पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया। वहीं लोकगायिका रेखा देवार ने पारंपरिक भरथरी गायन एवं देवार गीतों की प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की प्राचीन लोकगायन परंपरा को जीवंत कर दिया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को लोकसंस्कृति की गहराई और परंपराओं से जोड़ने का काम किया।
इसी क्रम में लोक संस्कृति, खेल एवं मानव कल्याण समिति भटगांव के लक्ष्मीकांत जड़ेजा एवं उनकी टीम ने प्रसिद्ध पंथी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक नृत्य मुद्राओं और लयबद्ध ताल के साथ कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। पंथी नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
इसी तरह पीएमसेजेस दाउपारा, पीएमसेजेस बी.आर.साव, शासकीय कन्या उच्चतर हायर सेकेण्डरी स्कूल तथा शासकीय कन्या उच्चतर हायर सेकेण्डरी स्कूल करही के विद्यार्थियों और पंथी, लोक रंग मंच एवं अन्य स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या में आधुनिक छत्तीसगढ़ी गीतों से लेकर पारंपरिक लोकगायन और लोकनृत्य तक विविध रंग देखने मिला।

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