October 18, 2026

मुंगेली में अवैध प्लाटिंग पर प्रशासनिक सुस्ती: तीन साल से सिर्फ नोटिस का खेल, धरातल पर कार्रवाई अब भी सवालों के घेरे में

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मुंगेली में अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के नाम पर तीन साल से नोटिसों का खेल!


दो कलेक्टर बदले, कई अधिकारियों का हुआ तबादला, लेकिन जमीन कारोबारियों पर ठोस कार्रवाई अब भी सवालों के घेरे में
स्वर्ण वाटिका सहित कई कॉलोनियों को लेकर उठते रहे सवाल, एफआईआर के निर्देश और फाइलों के बीच उलझा मामलाय प्लॉट खरीदने वाले लोग मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में


मुंगेली – जिले में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लंबे समय से प्रशासनिक व्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। नगर पालिका परिषद मुंगेली के शहरी क्षेत्र से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक जमीन की खरीद-बिक्री और बिना अनुमति कॉलोनी विकसित किए जाने के मामलों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इन शिकायतों पर कार्रवाई के नाम पर बीते लगभग तीन वर्षों से नोटिस जारी करने, जांच कराने और फाइलें आगे बढ़ाने का सिलसिला तो चलता रहा, लेकिन ठोस कार्रवाई कितनी हुई, यह आज भी बड़ा सवाल बना हुआ है।


इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा शिक्षक नगर के समीप पंडरिया रोड स्थित स्वर्ण वाटिका की रही है। इस कॉलोनी को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगरवासियों ने समय-समय पर आपत्तियां उठाई हैं। नगर पालिका परिषद की बैठकों में भी इस विकास कार्य को लेकर सवाल खड़े किए गए। शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचीं, नोटिस जारी हुए और कार्रवाई के लिए फाइलें भी आगे बढ़ीं, लेकिन शिकायतकर्ताओं की मानें तो अब तक उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिला है।


मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि अलग-अलग समय पर प्रशासनिक अधिकारियों के बदलने के बावजूद अवैध प्लाटिंग के मामलों का स्थायी समाधान सामने नहीं आया। इस बीच दो कलेक्टरों का कार्यकाल भी पूरा हो गया। ऐसे में शहरवासियों के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया कहां अटक रही है और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही कब तय होगी।
स्वर्ण वाटिका को लेकर परिषद से कलेक्ट्रेट तक पहुंची शिकायतें – स्वर्ण वाटिका को लेकर नगर पालिका परिषद मुंगेली में लगातार शिकायतें और आपत्तियां सामने आती रही हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 16 जनवरी 2024 को पार्षद मोहित बंजारा सहित नगरवासियों की ओर से नगर पालिका प्रशासन को शिकायत सौंपकर स्वर्ण वाटिका समेत शहर के अन्य क्षेत्रों में हो रही अवैध प्लाटिंग की जांच की मांग की गई थी।


शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे नाले के पास विकसित की जा रही स्वर्ण वाटिका में बिना आवश्यक अनुमति के प्लॉट काटे जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा था कि कॉलोनी में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली, गार्डन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया जा रहा है, लेकिन नियमानुसार सुविधाओं का विकास नहीं किया गया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि बिना अनुमति विकसित की जाने वाली कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में बैंक ऋण, भवन निर्माण की अनुमति और मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी आधार पर संबंधित भूमि की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई थी।


15 फरवरी और 27 फरवरी 2024 को जारी हुए नोटिस -नगर पालिका परिषद मुंगेली के उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, स्वर्ण वाटिका के मामले में प्रशासन की ओर से 15 फरवरी 2024 को पहला नोटिस जारी किया गया था। यह नोटिस निहारिका, पुत्री राजेंद्र कुमार, निवासी मुंगेली के नाम से जारी हुआ था।


नोटिस में वार्ड क्रमांक 13, अंबेडकर वार्ड, पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे नाले के पास खसरा नंबर 773/1, रकबा 2.314 हेक्टेयर भूमि पर स्वर्ण वाटिका के नाम से बिना शासन की अनुमति के अवैध प्लाटिंग किए जाने की शिकायत का उल्लेख किया गया था। नगर पालिका ने संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर प्लाटिंग का कार्य बंद करने और कॉलोनाइजर लाइसेंस सहित भूमि से संबंधित सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में पालन नहीं होने पर अवैध प्लाटिंग हटाने तथा नगर पालिका अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद 27 फरवरी 2024 को अंतिम सूचना जारी की गई। इसमें पूर्व में जारी नोटिस का हवाला देते हुए पटवारी के प्रतिवेदन के आधार पर स्थल पर अवैध प्लाटिंग से संबंधित संरचनाएं निर्मित होने की बात कही गई। संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर प्लाटिंग बंद कर भूमि को मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर नगर पालिका द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और कार्रवाई में होने वाले खर्च की वसूली संबंधित पक्ष से की जाएगी।


हालांकि, इन नोटिसों के बाद मौके पर क्या कार्रवाई हुई, भूमि को मूल स्वरूप में लाने के निर्देशों का कितना पालन हुआ और आगे की जांच में क्या निष्कर्ष निकला, इसे लेकर स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी सामने आना जरूरी है।


उपमुख्यमंत्री की चेतावनी के बावजूद मुंगेली में कार्रवाई पर सवाल – प्रदेश में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव कई अवसरों पर सख्त रुख जाहिर कर चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 18 जनवरी 2024 और 22 अप्रैल 2026 को उन्होंने अवैध प्लाटिंग के मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध कॉलोनियों और प्लाटिंग के विरुद्ध कार्रवाई की खबरें सामने आने के बीच मुंगेली जिले की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि जब प्रदेश सरकार अवैध प्लाटिंग पर सख्ती की बात कर रही है, तब मुंगेली में शिकायतों और नोटिसों के बाद भी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हो पा रही है।


यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी है, क्या कानूनी प्रक्रिया में कोई बाधा है या फिर कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की ओर से दिया जाना आवश्यक है।
16 मई 2026 को प्रस्तावित थी पुलिस बल के साथ कार्रवाई – नगर पालिका परिषद मुंगेली के दस्तावेजों में 15 मई 2026 को सिटी कोतवाली थाना प्रभारी को भेजा गया एक पत्र भी शामिल है। इसमें नगर के शहरी क्षेत्र में हो रही अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
पत्र में उल्लेख किया गया था कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 (ग) के तहत कॉलोनी स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि को भूखंडों में विभाजित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है। नगर पालिका की ओर से 16 मई 2026 को सुबह सात बजे से कार्रवाई प्रस्तावित होने की जानकारी देते हुए आवश्यक महिला कांस्टेबल और पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
अब सवाल यह उठता है कि पुलिस बल की मांग के बाद प्रस्तावित कार्रवाई वास्तव में हुई या नहीं। यदि कार्रवाई हुई तो कितने स्थलों पर हुई, कितनी भूमि पर अवैध प्लाटिंग हटाई गई और कितने लोगों के विरुद्ध कानूनी कदम उठाए गए? वहीं यदि कार्रवाई नहीं हो सकी तो इसके पीछे क्या कारण रहे? इन बिंदुओं पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जनवरी 2026 में चार लोगों को फिर जारी हुआ नोटिस – अवैध प्लाटिंग के मामलों में नगर पालिका परिषद की ओर से 5 जनवरी 2026 को जारी एक अन्य नोटिस भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, यह नोटिस राधेश्याम राजपूत, वीरेंद्र कुमार सोनी, प्रदीप सिंह और अरविंद कुमार देवांगन को जारी किया गया था।
नोटिस में मुंगेली – पंडरिया मार्ग पर विकसित की जा रही एक कॉलोनी को बिना स्वीकृत लेआउट और आवश्यक अनुमति के विकसित किए जाने का उल्लेख किया गया था। नगर पालिका ने इसे छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निबंधन तथा शर्तें) नियम 2013 और छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की संबंधित धाराओं का उल्लंघन बताया था। संबंधित लोगों को 15 दिनों के भीतर निर्माण और विकास कार्य बंद करने तथा निर्मित संरचनाओं को हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि निर्देशों का पालन नहीं होने पर निर्माण सामग्री जब्त करने, विधिसम्मत कार्रवाई करने और आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस नोटिस की प्रतिलिपि कलेक्टर, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश बिलासपुर, विद्युत विभाग, एसडीएम, तहसीलदार, नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष और पंजीयन कार्यालय को भी भेजे जाने का उल्लेख है। इससे स्पष्ट होता है कि अवैध प्लाटिंग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों और नोटिसों की प्रक्रिया केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं रही है। हालांकि, नोटिस में दी गई चेतावनियों के बाद संबंधित स्थलों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
प्लॉट खरीदने वालों के सामने मूलभूत सुविधाओं का संकट – अवैध प्लाटिंग का सबसे बड़ा खामियाजा उन आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है, जो अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं। कॉलोनी विकसित करने के दौरान सड़क, नाली, पेयजल, बिजली, जल निकासी और अन्य जरूरी सुविधाओं का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन बाद में इन सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर विवाद खड़े हो सकते हैं।

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