मुंगेली: शासकीय भूमि पर अवैध बहुमंजिला इमारत का निर्माण, नगर पालिका और प्रशासन की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठे सवाल
डिप्टी CM के गृहजिले में ही शासन को चूना…शासकीय जमीन पर अवैध रूप से तान दी बहुमंजिला बिल्डिंग…जिला प्रशासन मूकदर्शक, नगर पालिका की बोलती बंद…
मुंगेली/ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) के गृहजिले मुंगेली में अवैध निर्माण करने वाले और भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का। सरकारी जमीनों को अपनी बपौती समझकर निगलने का खेल धड़ल्ले से जारी है। ताजा मामला शहर के एक प्रमुख हिस्से का है, जहां बेशकीमती शासकीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर एक आलीशान बहुमंजिला बिल्डिंग खड़ी की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है और नगर पालिका परिषद की बोलती पूरी तरह बंद है।
लाखों-करोड़ों की सरकारी जमीन पर ‘डकैती’…
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस शासकीय जमीन पर यह अवैध निर्माण किया गया है, उसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है नियम-कायदों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य शुरू किया और देखते ही देखते सरकारी जमीन पर एक बड़ी इमारत खड़ी हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस निर्माण के लिए न तो नगर पालिका से कोई वैध अनुमति ली गई हैं और न ही राजस्व विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिला। इसके बावजूद बिना किसी डर के शासन-प्रशासन की नाक के नीचे यह अवैध निर्माण जारी हैं।
नगर पालिका की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठ रहे सवाल…
शहर के भीतर बिना अनुमति के एक ईंट भी खिसकने पर नोटिस थमाने वाली नगर पालिका इस मामले में पूरी तरह ‘मेहरबान’ नजर आ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब इस अवैध निर्माण की शुरुआत हो रही थी, तब नगर पालिका के अधिकारियों और नेताओं को इसकी भनक थी। लेकिन मोटी साठगांठ और रसूखदारों के दबाव के आगे नगर पालिका ने अपनी आंखें मूंद लीं। आज स्थिति यह है कि अवैध बिल्डिंग बनकर तैयार है, लेकिन नगर पालिका की बोलती बंद है।
डिप्टी सीएम का गृहजिला, फिर भी बेलगाम हौसले…
यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मुंगेली जिला खुद प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का गृहक्षेत्र है। सरकार एक तरफ प्रदेश में जीरो टॉलरेंस और सुशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डिप्टी सीएम के ही गृहजिले में रसूखदारों और भू-माफिया खुलेआम शासन को राजस्व क्षति पहुंचा चूना लगा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि स्थानीय स्तर पर बैठे प्रशासनिक अधिकारियों, रसूखदारों और भू-माफियाओं के बीच का गठजोड़ कितना मजबूत है।
मूकदर्शक बना जिला प्रशासन…
राजस्व और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी सरकारी संपत्तियों की रक्षा करना है। लेकिन मुंगेली में प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। शिकायतें होने के बावजूद अब तक न तो अवैध निर्माण को रोकने की कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही संबंधित को कोई कड़ा नोटिस जारी हुआ। प्रशासन के इस ठंडे रवैये से जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि रसूखदारों के लिए नियम-कानून मायने नहीं रखते। हाल ही में इसकी लिखित शिकायत एक पार्षद द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में भी किया गया हैं।
12 पेटी की चर्चा…
स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा हैं कि शासकीय जमीन में अवैध निर्माण को संरक्षण देने कमीशनखोरों के बीच 12 पेटी का बँटवारा हुआ हैं।
“नगर पालिका क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति, बिना नक्शा स्वीकृति अथवा शासकीय भूमि पर निर्माण किया गया है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिकायत प्राप्त हुआ है संबंधित निर्माण स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा। यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो नोटिस जारी करने से लेकर निर्माण हटाने तक की कार्रवाई की जाएगी। नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या प्रभावशाली व्यक्ति। किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।”
— होरी सिंह ठाकुर, सीएमओ, नगर पालिका परिषद मुंगेली
मुख्य नगर पालिका अधिकारी के आदेश के बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा अवैध निर्माण वालों को नोटिस न भेजना समझ से बाहर हैं।
“नगर पालिका परिषद शहर के सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यदि शासकीय भूमि पर कब्जा कर निर्माण किए जाने की शिकायत मिली है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नियम विरुद्ध पाए जाने वाले निर्माणों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जनता को यह विश्वास होना चाहिए कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।”
— जयप्रकाश मिश्रा, उपाध्यक्ष, नगर पालिका परिषद मुंगेली

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