शंकर मंदिर के पास भीषण आग, घंटों नहीं पहुँची दमकल: नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही उजागर
मुंगेली।
शहर के हृदय स्थल शंकर मंदिर के समीप स्थित पूनम जनरल स्टोर में लगी भीषण आग ने मुंगेली नगरपालिका प्रशासन की तैयारियों और जिम्मेदारियों की सच्चाई सामने ला दी है। इस भयावह अग्निकांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सूचना मिलने के बावजूद घंटों तक दमकल (फायर ब्रिगेड) की टीम मौके पर नहीं पहुँची। समय पर मदद न मिलने के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते पूरी दुकान जलकर खाक हो गई। इस घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक दुकान से धुआँ उठता दिखाई दिया और कुछ ही देर में ऊँची-ऊँची लपटें निकलने लगीं। शंकर मंदिर के आसपास का इलाका अत्यंत सघन है, जहाँ एक-दूसरे से सटी दुकानें, मकान और धार्मिक स्थल मौजूद हैं। आग की भयावहता देखकर आसपास के लोग दहशत में आ गए। कई परिवार अपने घरों से बाहर निकल आए, क्योंकि उन्हें डर था कि आग कहीं पूरी बस्ती को अपनी चपेट में न ले ले।
आपदा की इस घड़ी में जब नगरपालिका और दमकल विभाग को सबसे अधिक सक्रिय होना चाहिए था, तब उनकी अनुपस्थिति ने लोगों को खुद ही मोर्चा संभालने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय लोगों ने बाल्टियों, पाइपों और अन्य घरेलू संसाधनों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि इन प्रयासों का कोई खास असर नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि यदि दमकल की गाड़ी समय पर पहुँच जाती, तो आग को शुरुआती चरण में ही काबू में किया जा सकता था और इतना बड़ा नुकसान नहीं होता।
इस घटना ने नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए रहे। दुकानदार की जीवनभर की मेहनत और पूंजी आंखों के सामने जलती रही, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई त्वरित सहायता नहीं मिली। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब नगरपालिका की लापरवाही उजागर हुई हो, बल्कि आए दिन किसी न किसी मामले में प्रशासन की सुस्ती सामने आती रहती है।
घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह की घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है। यदि आग पास की अन्य दुकानों या घरों तक फैल जाती, तो जान-माल का नुकसान कई गुना अधिक हो सकता था। स्थानीय निवासियों का सवाल है कि क्या नगरपालिका किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार कर रही है? क्या तब जाकर ही व्यवस्था सुधारी जाएगी?
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। नागरिकों और व्यापारियों ने नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि कागजों में शहर की दमकल व्यवस्था भले ही दुरुस्त दिखाई देती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। लोगों का यह भी आरोप है कि नगर में आपदा प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं है और हर घटना के बाद सिर्फ आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही दमकल सेवा में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। इसके अलावा शहर की दमकल व्यवस्था को मजबूत करने, पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग उठी है।
फिलहाल, पूनम जनरल स्टोर पूरी तरह जलकर स्वाहा हो चुका है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, लेकिन दुकानदार को हुए आर्थिक और मानसिक आघात की भरपाई आसान नहीं है। यह अग्निकांड सिर्फ एक दुकान के जलने की घटना नहीं, बल्कि नगरपालिका प्रशासन की लचर व्यवस्था और उदासीन रवैये का प्रतीक बन गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर घटना से कोई सबक लेता है या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।

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