October 19, 2026

भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान द्वारा एग्रो-टेक्सटाइल्स पर राष्ट्रीय जागरूकता सेमिनार आयोजित

0
IMG-20251115-WA0941.jpg

राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, इंदौर तथा भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा एग्रो-टेक्सटाइल्स और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता मानकों पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. राय ने किसानों को एग्रो-टेक्सटाइल्स के उपयोग, उनके महत्व, आधुनिक कृषि में उनकी बढ़ती आवश्यकता तथा गुणवत्ता-आधारित कृषि उपकरणों के लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

सेमिनार के संयोजक एवं संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले मानक उत्पादों, एग्रो-टेक्सटाइल्स तथा गुणवत्ता नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

भारतीय मानक ब्यूरो के वैज्ञानिक-बी गौरव मिश्रा ने किसान जागरूकता और डेमोंस्ट्रेशन सत्र में भारतीय मानकों की अनिवार्यता पर विस्तारपूर्वक प्रस्तुति दी। उन्होंने किसानों को सिंचाई पाइप, फसल सुरक्षा जाल, जल संरक्षण सामग्री तथा अन्य कृषि उत्पादों में मानकों के पालन के महत्व के साथ-साथ भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमाणन चिन्ह “आईएसआई” मार्क की पहचान, उसके लाभ तथा निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत कराया। उन्होंने ‘बीआईएस केयर’ मोबाइल एप के उपयोग की जानकारी भी दी, जिसके माध्यम से किसान किसी भी उत्पाद की प्रामाणिकता और लाइसेंस की वैधता की जांच कर सकते हैं। कार्यक्रम में प्रमाणित एवं गैर-प्रमाणित उत्पादों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किया गया, जिससे किसानों को दोनों के बीच अंतर स्पष्ट रूप से समझ आया।

सेमिनार के दौरान आयोजित परस्पर संवाद सत्र में किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सक्रिय चर्चा हुई, जिसमें उत्पादों की गुणवत्ता जांचने की तकनीक, एग्रो-टेक्सटाइल्स के व्यावहारिक उपयोग, सिंचाई दक्षता और फसल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया।

इस कार्यक्रम में 100 से अधिक किसान शामिल हुए और इसे अत्यंत लाभकारी बताते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ममता चौधरी द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed