October 19, 2026

सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच तेज, 5 नायब तहसीलदार और 5 राजस्व लिपिकों को नोटिस

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बिलासपुर,  सर्पदंश से मौत के मामलों में करोड़ों रुपये के मुआवजे के कथित फर्जीवाड़े की जांच अब नए

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बिलासपुर,  सर्पदंश से मौत के मामलों में करोड़ों रुपये के मुआवजे के कथित फर्जीवाड़े की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। बिलासपुर पुलिस ने मामले में पांच नायब तहसीलदारों और पांच राजस्व लिपिकों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है। हालांकि, नोटिस मिलने के बावजूद अब तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं हो सके हैं, जिससे जांच की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।


पुलिस उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है, जिनके कार्यक्षेत्र में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सर्पदंश से मृत्यु के मामलों में प्राकृतिक आपदा राहत मद से मुआवजा स्वीकृत किया गया था। विधानसभा में मामला उठने के बाद दर्ज एफआईआर में वकीलों, चिकित्सकों, राजस्व विभाग के कर्मचारियों और बिचौलियों को आरोपी बनाया गया है। अब तक इस मामले में 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पंचनामों के आधार पर मुआवजा स्वीकृत किया गया। इस प्रक्रिया में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में है। बताया गया कि शुरुआती जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में तत्कालीन तहसीलदार प्रकाश साहू, तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. श्रीकेश कुमार गुप्ता और संबंधित थाना प्रभारी शामिल थे।
जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि जिन थाना प्रभारियों ने शुरुआती जांच के दौरान कथित अनियमितताओं पर सवाल नहीं उठाए, वही अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। ऐसे में स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग भी तेज हो गई है।


सिटी कोतवाली, सिविल लाइन, सरकंडा, सिरगिट्टी और कोनी थाना क्षेत्रों से जुड़े मामलों में संबंधित पांच नायब तहसीलदारों द्वारा स्वीकृत फाइलों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन और सभी संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज होने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

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