मुंगेली: जिला बनने के 13 साल बाद भी ‘घोषणाओं के भंवर’ में फंसा विकास; रेल, मेडिकल कॉलेज और बुनियादी सुविधाओं का सपना आज भी अधूरा
विशेष रिपोर्ट:विकास की दौड़ में पिछड़ा मुंगेली,कागजों पर दौड़ रही विकास की गाड़ी,जमीन पर जनता आज भी बदहाल
मुंगेली/छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद और अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही मुंगेली को जिला बनाने की मांग गूंजती रही। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए 15 अगस्त 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मुंगेली सहित 9 नवीन जिलों की घोषणा की और 1 जनवरी 2012 को मुंगेली जिला अस्तित्व में आया। उस वक्त जिले की जनता की आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे। लोगों को लगा था कि जिला बनने से संसाधनों की बाढ़ आएगी और मुंगेली विकास के मानचित्र पर लंबी छलांग लगाएगा। लेकिन आज 13 साल बाद हकीकत इसके उलट है। मुंगेली विकास की मुख्यधारा में शामिल होने के बजाय ‘घोषणाओं का जिला’ बनकर रह गया है।
बाकी जिले निकले आगे,मुंगेली वहीं का वहीं
हैरानी की बात यह है कि 2012 में मुंगेली के साथ बने अन्य जिले आज विकास के मामले में कोसों आगे निकल चुके हैं। मुंगेली की स्थिति उस धावक जैसी हो गई है जो दौड़ता तो बहुत है,लेकिन एक ही घेरे में गोल-गोल घूमकर वहीं खड़ा हो जाता है। प्रशासनिक ढांचे के नाम पर कलेक्टर,एसपी और जिला न्यायालय जैसे दफ्तर तो खुल गए,लेकिन आम जनता की बुनियादी मांगें आज भी ठंडे बस्ते में हैं।
रेल लाइन:खुशियां मनी,जश्न मनाए,लड्डू बंटे,पर पटरी का आजतक पता नहीं
मुंगेली की जनता दशकों से रेल लाइन की बाट जोह रही है। 2018 के रेल बजट में जब ‘कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़’ रेल लाइन को मंजूरी मिली, तो लगा कि वनवास खत्म हुआ। तत्कालीन सांसदों ने बड़े-बड़े मंच सजाकर अपना सम्मान कराया, जनता ने आभार जताया। लेकिन विडंबना देखिए,घोषणा के 8 साल बाद भी इस परियोजना की एक ईंट तक नहीं रखी गई। रेल आने से रोजगार और व्यापार के जो सपने बुने गए थे,वे अब निराशा में बदल चुके हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा:मेडिकल कॉलेज की चर्चा और बिखरा हुआ प्रशासन
2024 के बजट सत्र में मुंगेली में मेडिकल कॉलेज की गूंज सुनाई दी। जमीन चिन्हित करने की बातें हुईं, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। इसके अलावा,जिले के प्रशासनिक विकेंद्रीकरण ने जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
जिला पंचायत:शहर से 8 किमी दूर (धरमपुरा)
तहसील एवं रजिस्ट्री कार्यालय:4 किमी दूर (गिधा)
परिवहन कार्यालय:6 किमी दूर (बछेरा)
पॉलिटेक्निक कॉलेज:7 किमी दूर (उमरिया)
जिला अस्पताल:रामगढ़ में स्थित है।
तैयार की गई रणनीतियों के अभाव में आम जनता को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर जाने के लिए मीलों का चक्कर काटना पड़ता है।
दम तोड़ती आगर नदी और प्रशासनिक सुस्ती
जिले की जीवनदायिनी ‘आगर नदी’ आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कभी बारहमासी पानी से लबालब रहने वाली यह नदी आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। नदी के संरक्षण को लेकर न तो कोई ठोस योजना बनी और न ही धरातल पर कोई काम दिखा।
‘दिग्गज’ नेतृत्व के बावजूद कछुआ चाल विकास
वर्तमान में मुंगेली का राजनीतिक कद प्रदेश में सबसे ऊंचा है। जिले के पास उपमुख्यमंत्री अरुण साव (लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन विभाग) और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू जैसा कद्दावर नेतृत्व है। अजेय योद्धा पुन्नूलाल मोहले भी विधायक के रूप में सक्रिय हैं। उपमुख्यमंत्री द्वारा 100 करोड़ के विकास कार्यों (नालंदा परिसर,हाईटेक बस स्टैंड,गौरवपथ,स्वागत द्वार) की घोषणा तो की गई है,लेकिन जमीन पर काम शुरू होने का इंतजार है।
सवाल यह उठता है कि:
जब शासन स्तर से बजट स्वीकृत है,तो स्थानीय प्रशासन जमीन चिन्हित करने में देरी क्यों कर रहा है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी मुंगेली के विकास को लेकर गंभीर नहीं हैं?
क्या मुंगेली की जनता केवल चुनावी घोषणाओं का माध्यम बनकर रह जाएगी?
मुंगेली की जनता आज भी उस ‘लंबी छलांग’ का इंतजार कर रही है,जिसका सपना 2012 में दिखाया गया था।

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