October 20, 2026

तखतपुर में सरकारी सहायता घोटाले की जांच के बीच युवक की आत्महत्या, सिस्टम की खामियों पर उठे सवाल

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तखतपुर। सरकारी तंत्र की खामियों और कथित जालसाजी के एक मामले ने उस समय बेहद दुखद मोड़ ले लिया, जब पुलिसिया कार्रवाई के भय और सामाजिक दबाव के बीच 20 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। ग्राम चना डोंगरी निवासी कमलेश श्रीवास ने थाने से लौटने के बाद अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

पूरा मामला क्या है?
विवाद की शुरुआत 4 लाख रुपये की उस सहायता राशि से हुई, जो आवेदिका उर्वशी श्रीवास ने अपने पति पुरुषोत्तम श्रीवास की सर्पदंश से हुई मृत्यु के नाम पर प्राप्त की थी। कलेक्टर, बिलासपुर के निर्देश पर हुई जांच में सामने आया कि जिस मर्ग रिपोर्ट (क्र. 23/2022) के आधार पर यह राशि स्वीकृत हुई, वह वास्तव में शोभाराम कौशिक नामक व्यक्ति की थी, जिनकी मृत्यु फांसी से हुई थी। यानी दस्तावेज़ों का गलत इस्तेमाल कर सहायता राशि ली गई।

फर्जी हस्ताक्षरों की पुष्टि
तत्कालीन तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने जांच के दौरान स्पष्ट किया कि आदेश पत्र पर दर्ज उनके हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी हैं। इसके बाद धोखाधड़ी (धारा 420) के तहत एफआईआर दर्ज की गई और कमलेश श्रीवास तथा उसकी मां को बयान के लिए थाने बुलाया गया।

थाने से लौटकर उठाया आत्मघाती कदम
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिसिया कार्रवाई का खौफ और सामाजिक बदनामी की आशंका कमलेश सहन नहीं कर सका। थाने से लौटने के बाद वह सीधे घर पहुंचा, ताला तोड़ा और फांसी लगा ली। पड़ोसियों को जब घटना की जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल 112 को सूचना दी। टीम मौके पर पहुंची और युवक को फंदे से नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

संयोग या सिस्टम की खामी?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि तखतपुर राजस्व विभाग के हालिया मामलों में एक चिंताजनक पैटर्न दिख रहा है—

भारत माला प्रकरण में एफआईआर के बाद एक पूर्व पटवारी ने आत्महत्या कर ली।

सर्पदंश सहायता प्रकरण में एफआईआर के दो दिन के भीतर ही आरोपी परिवार के युवा सदस्य की मौत हो गई।


पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना प्रशासनिक प्रक्रियाओं, जांच की संवेदनशीलता और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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