विकसित भारत @2047: भारतीय शहरी पुनर्जागरण का स्वर्णिम काल
लेखक: तोखन साहू (राज्य मंत्री, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओजस्वी नेतृत्व में भारत आज अपनी नियति के उस स्वर्णिम सोपान पर है, जहाँ ‘अमृत काल’ के संकल्प अब ‘सिद्धि’ के महायज्ञ में रूपांतरित हो रहे हैं। 1 फरवरी को प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 मात्र आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत @2047’ के महान स्वप्न को धरातल पर उतारने वाला एक युगांतरकारी नीतिगत दस्तावेज है। कर्तव्य भवन की पावन ऊर्जा से रचित यह बजट—गति, समावेशिता और निरंतरता (Momentum, Inclusion & Sustainability) के तीन अभेद्य स्तंभों पर टिका है, जो एक आत्मनिर्भर और समर्थ भारत का जयघोष करता है।
समृद्धि के केंद्र में शहरी भारत: विकास का नया ऊर्जा-पुंज
आज हमारे शहर केवल आबादी के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति के ‘ग्रोथ इंजन’ हैं। बजट में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के लिए ₹85,522 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन—जो पिछले वर्ष (RE) की तुलना में 49.5% की भारी वृद्धि है—सरकार के इस अटल विश्वास का प्रमाण है कि भारत की आर्थिक महाशक्ति बनने का मार्ग हमारे आधुनिक शहरों से ही प्रशस्त होगा। जीडीपी में 60% से अधिक का योगदान देने वाला शहरी भारत अब नवाचार और रोजगार का वैश्विक केंद्र बनेगा।
आवास से आत्मसम्मान: अंत्योदय का संकल्प
- छत भी, सम्मान भी:- प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु ₹18,625 करोड़ का भारी आवंटन केवल ‘सबके लिए घर’ का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह करोड़ों परिवारों को सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक न्याय की मुख्यधारा से जोड़ने का महा-अनुष्ठान है।
- अंतिम व्यक्ति का उत्थान:- ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को साकार करते हुए पीएम स्वनिधि योजना के बजट में 57% की वृद्धि (₹900 करोड़) हमारे उन लघु शहरी उद्यमियों के प्रति राष्ट्र का कृतज्ञ नमन है, जो अपनी मेहनत से शहरों को गतिमान रखते हैं।
विकेंद्रीकरण:-महानगरों से परे नए ‘आर्थिक तीर्थों’ का उदय
यह बजट क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त कर भारत के कण-कण को विकास से जोड़ने का संकल्प है। ‘शहरी आर्थिक क्षेत्र’ (Urban Economic Zones) की अभिनव परिकल्पना के तहत Tier-2, Tier-3 शहरों और तीर्थ नगरों को ₹5,000 करोड़ तक की सहायता देना एक क्रांतिकारी कदम है। यह महानगरों के दबाव को कम कर छोटे शहरों को संभावनाओं के नए क्षितिज प्रदान करेगा। साथ ही, ₹10,000 करोड़ का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ शहरों के बीच नवाचार और श्रेष्ठ नियोजन की नई प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा।
आत्मनिर्भरता और भविष्योन्मुखी अवसंरचना
पूंजीगत व्यय (Capex) को ₹12.2 लाख करोड़ की नई ऊँचाई पर ले जाना और 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण भारत की रफ़्तार को अजेय बनाने का संकल्प है। वहीं, नगर निकायों को म्यूनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से आर्थिक रूप से ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का आह्वान (₹1,000 करोड़ से अधिक के इश्यू पर ₹100 करोड़ की सहायता) सुशासन की नई परिभाषा है। अमृत (AMRUT) योजना हेतु ₹8,000 करोड़ और सेंट्रल विस्टा हेतु ₹4,000 करोड़ का प्रावधान राष्ट्रीय गौरव और सार्वजनिक सुविधाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
राजकोषीय शुचिता और ईज ऑफ लिविंग
सरकार ने विकास की इस विराट महत्वाकांक्षा के साथ-साथ 4.3% के राजकोषीय घाटे का अनुशासित लक्ष्य और 2030-31 तक कर्ज-जीडीपी अनुपात को 50% तक लाने का रोडमैप प्रस्तुत कर ‘जिम्मेदार शासन’ की मिसाल पेश की है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार और संपत्ति कर के सरलीकरण से नागरिकों का जीवन सुगम होगा और व्यवसाय की सुगमता (Ease of Doing Business) को नई उड़ान मिलेगी।
उपसंहार
बजट 2026-27 केवल भविष्य की योजना नहीं, बल्कि एक लचीले, समृद्ध और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत का संकल्प-पत्र है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के साथ, भारत आज अडिग आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है—जहाँ विकास सर्वस्पर्शी है, प्रगति स्थायी है और प्रत्येक भारतीय शहर ‘विकसित भारत’ के निर्माण का एक तेजस्वी केंद्र है। यह समय भारत का है, यह समय भारतीय शहरों के पुनर्जागरण का है।

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