बिलासपुर–रायगढ़ नेशनल हाईवे पर टोल फ्री सेवाओं की लापरवाही उजागर
बिलासपुर–रायगढ़ नेशनल हाईवे क्रमांक 49 पर जिला जांजगीर-चांपा क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। इस व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक व्यक्ति बेसुध हालत में सड़क किनारे पड़ा रहा, लेकिन लगभग एक घंटे तक उसे किसी भी प्रकार की सरकारी या आपातकालीन सहायता नहीं मिल सकी। यह घटना टोल फ्री सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उक्त व्यक्ति सड़क किनारे अचेत अवस्था में पड़ा था। उसकी हालत देखकर आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद के लिए टोल फ्री नंबरों पर संपर्क किया। सबसे पहले डायल 112 पर फोन किया गया, इसके बाद 108 एंबुलेंस सेवा और नेशनल हाईवे पेट्रोलिंग को भी सूचित किया गया। बावजूद इसके, एक घंटे तक कोई भी टीम मौके पर नहीं पहुंची।
इस दौरान राहगीर और स्थानीय लोग लगातार सहायता की आस में इंतजार करते रहे। हाईवे जैसे संवेदनशील मार्ग पर इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। यदि व्यक्ति की हालत गंभीर होती या सड़क पर यातायात के बीच कोई दुर्घटना घटती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता—यह बड़ा सवाल है।
सरकार द्वारा आमजन की सुरक्षा और आपात स्थिति में त्वरित सहायता के लिए 112, 108 और हाईवे पेट्रोलिंग जैसी टोल फ्री सेवाएं संचालित की जाती हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य यही है कि संकट की घड़ी में नागरिकों को तुरंत मदद मिल सके। लेकिन इस घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि टोल फ्री सेवाएं समय पर मदद नहीं कर सकतीं, तो उनका औचित्य ही क्या रह जाता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी जरूरतमंद को इस तरह लाचार होकर सड़क पर न पड़ा रहना पड़े।

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