October 19, 2026

3 दिसम्बर – अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर विशेष

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दिव्यांग नहीं अदम्य इच्छाशक्ति की कहानी  हम सब साथ तभी समावेशी भारत का निर्माण  डॉ मनीष बंजारा

दिव्यांगता शरीर में होती है, हौसलों में नहीं—बस हमें उनकी राह आसान बनानी है, ताकि उनका हर कदम सम्मान से उठे- डॉ मनीष बंजारा

आज अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर हम उन सभी विशेष व्यक्तियों का सम्मान करते हैं, जिनकी जीवन यात्रा संघर्षों से भरी होने के बावजूद हौसले, प्रतिभा और आत्मविश्वास की उज्ज्वल मिसाल है। यह दिन केवल जागरूकता का नहीं, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति को धन्यवाद देने का भी अवसर है, जिसने चुनौतियों को अपनी शक्ति में बदला और दुनिया को यह संदेश दिया कि मन की ताकत किसी भी सीमा से बड़ी होती है।

डॉ मनीष बंजारा ने बताया कि
दिव्यांग वह व्यक्ति है, जिसके शरीर, मन या किसी संवेदन क्षमता में ऐसी कमी या चुनौती हो, जो उसके दैनिक जीवन, चलने-फिरने, सुनने-देखने, सीखने या काम करने की क्षमता को प्रभावित करे।

*दिव्यांग के जीवन में क्या परेशानियाँ होती है*

*रोजमर्रा के कामों में दूसरों पर निर्भरता*

1- समाज की गलत धारणाएँ और नजरें

2 शिक्षा, रोजगार और अवसरों तक पहुँचने में मुश्किल

3 परिवहन और सार्वजनिक स्थानों पर बाधाएँ

4 आत्मसम्मान और भावनाओं पर गहरा प्रभाव




डॉ बंजारा ने आगे बताया दिव्यांगजन हमारे समाज की अटूट प्रेरणा हैं—जो कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कान, धैर्य और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ते हैं। उनके अंदर छिपी अनोखी क्षमताएँ और संवेदनाएँ हमें यह याद दिलाती हैं कि एक समावेशी समाज की शुरुआत सोच से नहीं, बल्कि समान अवसर देने के हमारे संकल्प से होती है।इस अवसर पर ग्राम के दिव्यांग टिक्कू केवट उम्र 36 वर्ष को वाकिंग स्टिक दिया गया

आज के दिन हम सभी का कर्तव्य है कि—
• दिव्यांगजन के लिए सुगम वातावरण (Accessibility) सुनिश्चित करें
• शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं में बराबरी का अवसर प्रदान करें
• संवेदनशीलता, सम्मान और सहयोग की भावना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
• समाज में व्याप्त भेदभाव, उपेक्षा और सामाजिक बाधाओं को मिलकर समाप्त करें

हम यह स्वीकार करते हैं कि दिव्यांगजन केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और अवसर के हकदार हैं। उनकी सफलता समाज की सफलता है, और उनकी मुस्कान हमारी जिम्मेदारी का सुंदर परिणाम।



दिव्यांगजन के लिए एक सहज, संवेदनशील, सहयोगी और सक्षम वातावरण बनाने की दिशा में हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
अंत में उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर हम यह संकल्प लेते हैं कि—
“कोई भी पीछे न छूटे, हर मनुष्य समान सम्मान, समान अवसर और समान अधिकार पाए।”

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