October 19, 2026

मुंगेली में ब्याजखोरी का बढ़ता जाल: चक्रवृद्धि ब्याज की मार से आम नागरिक त्रस्त, बड़े व्यापारियों पर गंभीर आरोप

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मुंगेली । जिले में अवैध रूप से ब्याज पर पैसा देने का कारोबार दिनों-दिन गहराता जा रहा है। शहर से लेकर दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक कई बड़े व्यापारी और साहूकार बिना किसी वैधानिक अनुमति के ऊँचे ब्याज दरों पर रकम उधार देकर गरीबों का शोषण कर रहे हैं। बताया जाता है कि ये व्यापारी मासिक ब्याज के साथ-साथ चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) भी वसूल रहे हैं, जिससे मूलधन कई गुना बढ़ जाता है। स्थिति यह है कि कई परिवार कर्ज के इस जाल में इतने उलझ चुके हैं कि उनकी जमीन, खेत, घर और यहाँ तक कि बैंक पासबुक तक गिरवी रखवा ली गई है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मुंगेली और आसपास के क्षेत्रों में कुछ प्रभावशाली कारोबारियों द्वारा यह पूरी प्रक्रिया वर्षों से संचालित की जा रही है। जरूरत के समय थोड़ी रकम लेने वाले लोगों को बाद में ब्याज के नाम पर कई गुना राशि चुकानी पड़ती है। ब्याजखोर मासिक किस्त नहीं देने पर ब्याज को मूलधन में जोड़ देते हैं और फिर उस पर नया ब्याज लगाते हैं, जिससे कर्ज की राशि लगातार बढ़ती जाती है। यही चक्रवृद्धि प्रणाली गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन रही है।

कानून क्या कहता है? मनी लेंडिंग एक्ट के नियमों की खुलेआम धज्जियाँ

भारत में ब्याज पर पैसा देने का काम “मनी लेंडिंग एक्ट” के अंतर्गत नियंत्रित है।
कानून के अनुसार—

बिना लाइसेंस ब्याज लेकर उधार देना अपराध है।

सरकार द्वारा तय सीमा से अधिक ब्याज वसूलना अवैध है।

चक्रवृद्धि ब्याज वसूली कानून के विरुद्ध मानी जाती है।

उधार का उचित दस्तावेज, रसीद और रिकॉर्ड अनिवार्य है।

दबाव बनाकर जमीन, मकान या दस्तावेज कब्जे में लेना दंडनीय अपराध है।

इसके बावजूद मुंगेली जिले में कई व्यापारी इन नियमों की पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उधारी देते समय न तो कोई पक्का दस्तावेज बनाया जाता है और न ही ब्याज की दर स्पष्ट बताई जाती है। कुछ मामलों में समय पर ब्याज चुकाने के बावजूद मूलधन जस का तस बताया जाता है और अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि जब लोग भुगतान नहीं कर पाते, तो दबाव बनाकर जमीन और दस्तावेज हड़पने की कोशिश की जाती है।

आम नागरिकों की बढ़ती परेशानी

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ब्याजखोरी के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में फँस गए हैं।
कई मामलों में—

किसानों ने शादी या इलाज के लिए थोड़ी रकम उधार ली, लेकिन ब्याज इतना बढ़ा कि वर्षों बाद भी कर्ज खत्म नहीं हुआ।

कुछ परिवारों ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी।

कई मामलों में साहूकारों ने लोगों की बैंक पासबुक रखकर सरकारी योजनाओं की राशि तक रोक ली।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस अवैध प्रथा ने सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ाया है। गरीब वर्ग भय के कारण शिकायत भी नहीं कर पाता, जिससे ब्याजखोरी का यह जाल और मजबूत होता जा रहा है।

प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग

जिले के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ब्याजखोरी पर रोक लगाने कठोर कदम उठाए जाएँ। पीड़ितों का कहना है कि यह केवल आर्थिक उत्पीड़न नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है, जिसे रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक इस अवैध नेटवर्क को तोड़ा नहीं जाता, तब तक मुंगेली में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार राहत नहीं पा सकेंगे।

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