ललिता सखी का भव्य जन्मोत्सव आज ऊंचागांव में
बरसाना – राधा अष्टमी से ठीक दो दिन पूर्व भाद्रपद माह (भादों) की शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि के दिन बलदेव छठ (जिसे ललिता छठ भी कहा जाता है) के पावन अवसर पर राधारानी की अष्ट सखियों में अग्रणी प्रधान सखी — ललिता सखीजी का जन्मोत्सव इस वर्ष आज 29 अगस्त को ऊंचागांव स्थित ललिता सखी मंदिर प्रांगण में अत्यंत श्रद्धा , उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया जायेगा। इस पावन उत्सव की जानकारी देते हुये गोस्वामी उपेंद्र नारायण भट्ट पीठाधीश ब्रजाचार्य पीठ ऊंचागांव बरसाना (मथुरा) ने अरविन्द तिवारी को बताया कि आज प्रातः नौ बजे से भक्तों द्वारा बधाई गायन एवं भजन संकीर्तन का आरंभ होगा , जिससे मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो जायेगा। मध्यान्ह बारह बजे अभिषेक उत्सव संपन्न होगा , जिसमें श्रद्धालुजन ललिता सखीजी का दुग्ध , दधि , घृत , मधु एवं पंचामृत से भव्य अभिषेक करेंगे। इसके बाद दोपहर एक बजे महाआरती एवं पालना दर्शन का दिव्य आयोजन होगा , जिसमें सखीजी का झूले में विहार भावदृष्टि को प्रदान किया जायेगा। अंत में संत-महात्माओं एवं ब्राह्मणजनों को भंडारा प्रदान किया जायेगा तथा सभी भक्तों के लिये भी प्रसाद वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस पावन अवसर को भक्ति , प्रेम और सेवा के अद्भुत संगम का प्रतीक बताते हुये गोस्वामीजी ने सभी श्रद्धालुओं से इस दिव्य आयोजन में अपनी उपस्थित दर्ज कराकर पुण्यमयी बनाने को कहा है।
अष्ट सखियों में अग्र ललिताजी
हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार श्री राधारानी और श्रीकृष्ण की प्रिय सखी श्री ललिताजी थी। ब्रज भूमि और राधा-कृष्ण के मन्दिरों में उनका जन्मोत्सव बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है , यह दिन ललिताजी को समर्पित हैं। ललिता जी का जन्मोत्सव राधाष्टमी से पहले आता है। राधाजी की को अपनी सखियों में ललिताजी अतिप्रिय थी। पौराणिक ग्रंथो के अनुसार ललिताजी की भक्ति के बिना राधारानी को प्राप्त नही किया जा सकता। राधारानी को ललिताजी बहुत प्रिय थी। ललिताजी का पूजन एवं दर्शन बहुत ही शुभ माना जाता हैं। ललिताजी को भी राधारानी और श्रीकृष्ण से बहुत अनुराग था। ललिताजी बहुत ही बुद्धिमान थी। राधाजी की अष्टसखियाँ देवी ललिताजी के मार्गदर्शन में काम करती थी। सारी सखियाँ कृष्णजी और राधाजी की सेवा के लिये ललिताजी के प्रति बहुत भक्ति और सम्मान रखती थी। ललिताजी को श्री कृष्ण की अष्ट गोपियों में से एक माना जाता है जो राधारानी और भगवान कृष्ण की सबसे बड़ी भक्त थी। उन अष्टसखियों के नाम थे – ललिता , विशाखा , तुंगविद्या , चित्रलेखा , इंदुलेखा , चंपकलता , सुदेवी और रंगादेवी। इन अष्ट गोपियों में ललिताजी सबसे आगे थी। यह सभी अष्टसखियाँ हमारे सबके आराध्य श्री कृष्ण और श्री राधा के आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक हैं। ब्रज भूमि में बहुत से मंदिर हैं , जहां भगवान कृष्ण और राधारानी के साथ ललिता और विशाखा दो साखियों विराजमान हैं। राजस्थान के जयपुर शहर में स्थित लाड़लीजी के मंदिर में राधा-कृष्ण अपनी अष्ट सखियों के साथ विराजमान हैं। यहाँ हर वर्ष ललिता छठ पर ललिताजी का जन्मोत्सव और राधाष्टमी पर श्री राधारानी का जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया जाता हैं। यह मंदिर ललित सम्प्रदाय का हैं।उत्तरप्रदेश में वृंदावन में प्रसिद्ध पवित्र ललिता कुंड स्थित है , इसके विषय में यह मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से भक्तों को मोक्ष प्राप्त होता हैं। ललिताजी की भक्ति करने से मनुष्य को राधाजी की कृपा प्राप्त होती हैं। ललिताजी की आराधना करने से मनुष्य सौभाग्यशाली होता है और उसका सदा ही शुभ होता हैं। राधारानी और कृष्ण के लिये दिव्य प्रेम और भक्ति का प्रतिनिधित्व ललिताजी करती हैं। जो उनके प्रति समर्पण और भक्ति का भाव रखता है , वो उसके मार्ग की सभी बाधाओं को समाप्त कर देती हैं। कुछ स्थानों पर ललिताजी का जन्मोत्सव ललिता छ्ठ के दिन मनाया जाता है तो कुछ स्थानों पर सप्तमी के दिन जिसे ललिता सप्तमी कहा जाता है। इस वर्ष ललिता छठ का उत्सव 29 अगस्त शुक्रवार के दिन और ललिता सप्तमी का पर्व 30 अगस्त शनिवार के दिन मनायेंगे।

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