October 19, 2026

दो साल से नोटिस पर नोटिस, लेकिन कार्रवाई अधूरी: मुंगेली में अवैध प्लॉटिंग पर नगर पालिका के दावों की खुली पोल

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2024 से 2026 तक नोटिस, अंतिम चेतावनी, पुलिस बल की मांग और एफआईआर की बात… फिर भी जारी

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2024 से 2026 तक नोटिस, अंतिम चेतावनी, पुलिस बल की मांग और एफआईआर की बात… फिर भी जारी है अवैध कॉलोनियों का कारोबार; प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

मुंगेली। शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना वैधानिक अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। नगर पालिका परिषद मुंगेली के पिछले दो वर्षों के आधिकारिक अभिलेखों का अध्ययन कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2024 से लेकर वर्ष 2026 तक नगर पालिका ने अलग-अलग मामलों में नोटिस जारी किए, अंतिम चेतावनी दी, अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए, पुलिस बल की मांग की, एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी और संबंधित विभागों को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजे। इसके बावजूद शहर में अवैध प्लॉटिंग की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं।

यही कारण है कि अब सवाल केवल अवैध कॉलोनियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता, जवाबदेही और उसके वास्तविक परिणामों पर भी गंभीर बहस शुरू हो गई है।

नगर पालिका के रिकॉर्ड यह जरूर दर्शाते हैं कि कागजों पर कार्रवाई की प्रक्रिया लगातार चलती रही, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि आखिर उन नोटिसों का अंतिम परिणाम क्या निकला। क्या अवैध निर्माण वास्तव में हटाए गए? क्या किसी कॉलोनाइजर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई? क्या किसी पर आर्थिक दंड लगाया गया? इन सवालों के स्पष्ट उत्तर अब भी सामने नहीं आ पाए हैं।

2024 में स्वर्ण वाटिका से शुरू हुई कार्रवाई

नगर पालिका की कार्रवाई की शुरुआत 15 फरवरी 2024 को हुई, जब अंबेडकर वार्ड क्रमांक-13 स्थित “स्वर्ण वाटिका” नामक परियोजना के संबंध में पहला नोटिस जारी किया गया। शिकायत मिलने के बाद नगर पालिका ने संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर प्लॉटिंग बंद करने, कॉलोनाइजर लाइसेंस, स्वीकृत ले-आउट तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करना छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 सहित अन्य लागू प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा गया कि समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

12 दिन बाद ही जारी हो गया अंतिम नोटिस

पहले नोटिस के मात्र 12 दिन बाद, 27 फरवरी 2024 को नगर पालिका ने उसी मामले में अंतिम नोटिस जारी कर दिया। इसमें कहा गया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है तथा राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में मौके पर प्लॉटिंग के लिए आवश्यक संरचनाएं निर्मित पाए जाने की पुष्टि हुई है।

नगर पालिका ने संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर भूमि को मूल स्वरूप में लाने का निर्देश दिया और स्पष्ट चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर नगर पालिका स्वयं कार्रवाई करेगी तथा पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि अंतिम नोटिस जारी हो चुका था तो क्या उसके बाद वास्तव में अवैध निर्माण हटाया गया? यदि हटाया गया तो उसका सार्वजनिक रिकॉर्ड कहां है? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो फिर अंतिम नोटिस जारी करने का उद्देश्य क्या था?

करीब एक वर्ष बाद फिर शुरू हुई कार्रवाई

करीब एक वर्ष बाद नगर पालिका ने फिर एक नए मामले में कार्रवाई शुरू की। 5 जनवरी 2026 को जारी नोटिस में मुंगेली-पंडरिया मार्ग पर विकसित की जा रही एक अन्य कथित अवैध कॉलोनी के संबंध में चार लोगों को नोटिस भेजा गया।

नगर पालिका ने आरोप लगाया कि बिना वैध ले-आउट स्वीकृति और आवश्यक अनुमति के कॉलोनी विकसित की जा रही है। संबंधित लोगों को 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य बंद करने, बनाई गई सड़क और अन्य संरचनाएं हटाने तथा भूखंडों की बिक्री तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो नगर पालिका बिना किसी अतिरिक्त सूचना के निर्माण ध्वस्त करेगी और संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

अन्य विभागों को भी भेजे गए पत्र

इस कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए नगर पालिका ने केवल नोटिस जारी करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, सीएसपीडीसीएल, एसडीएम, तहसीलदार तथा जिला पंजीयक कार्यालय को भी पत्र भेजे गए।

इन पत्रों में संबंधित कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन देने, संपत्ति के पंजीयन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।

ऐसे में यदि इसके बाद भी कथित अवैध प्लॉटिंग जारी रही तो यह प्रश्न भी उठता है कि संबंधित विभागों ने इन निर्देशों पर कितना अमल किया।

16 मई की कार्रवाई के लिए मांगा गया पुलिस बल

नगर पालिका ने 15 मई 2026 को सिटी कोतवाली थाना प्रभारी को पत्र लिखकर 16 मई को प्रस्तावित कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की मांग की।

पत्र में उल्लेख था कि सुबह सात बजे से अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित है तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल उपलब्ध कराया जाए।

इससे यह संकेत मिलता है कि नगर पालिका प्रशासन उस समय कार्रवाई को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा था।

लेकिन क्या वास्तव में हुई कार्रवाई?

यहीं सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है।

यदि 16 मई को कार्रवाई प्रस्तावित थी तो—

क्या अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चला?

क्या सड़कें हटाई गईं?

क्या सीसी रोड तोड़ी गई?

क्या किसी कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई?

क्या किसी की गिरफ्तारी हुई?

क्या किसी पर जुर्माना लगाया गया?


नगर पालिका के उपलब्ध दस्तावेज इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं देते। यही कारण है कि प्रशासनिक कार्रवाई की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

फिर जारी हुआ अंतिम नोटिस

बाद में नगर पालिका ने मैसर्स राज प्रॉपर्टी डेवलपर्स के प्रोपराइटर सूरज मक्कड़ को अंतिम नोटिस जारी किया। इसमें उल्लेख किया गया कि 18 फरवरी और 15 मई को पूर्व में नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

नगर पालिका ने चेतावनी दी कि अब एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी तथा कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा।

दो वर्षों में नोटिसों की लंबी श्रृंखला

उपलब्ध अभिलेख बताते हैं कि नगर पालिका ने अलग-अलग मामलों में—

प्रारंभिक नोटिस जारी किए।

अंतिम नोटिस जारी किए।

पुलिस बल की मांग की।

एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी।

अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए।

खर्च वसूली की चेतावनी दी।

बिजली कनेक्शन रोकने के लिए विभागों को पत्र भेजे।

जिला पंजीयक कार्यालय को भी कार्रवाई के लिए लिखा।


इसके बावजूद यदि अवैध प्लॉटिंग की शिकायतें लगातार सामने आती हैं तो प्रशासनिक कार्रवाई की सफलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

नागरिकों में भी बढ़ रहा असंतोष

शहर के अनेक नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कार्रवाई करता तो अवैध कॉलोनियों का विस्तार इतनी तेजी से नहीं होता।

लोगों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करने से कानून का पालन सुनिश्चित नहीं होता। जब तक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल होगा।

क्या केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा अभियान?

नगर पालिका के दस्तावेज कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि तो करते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करते कि चेतावनी के बाद कितने मामलों में अवैध निर्माण वास्तव में हटाए गए, कितनी एफआईआर दर्ज हुईं, कितनों पर जुर्माना लगाया गया और कितने मामलों का अंतिम निपटारा हुआ।

यही वजह है कि विपक्ष और शहर के कई लोग इस पूरे अभियान को केवल कागजी कार्रवाई करार दे रहे हैं।

सबसे बड़ा नुकसान खरीदारों को

अवैध कॉलोनियों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव उन लोगों पर पड़ता है जो जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदते हैं। बाद में यदि कॉलोनी अवैध घोषित होती है या विकास कार्य रुक जाते हैं तो सबसे अधिक आर्थिक और कानूनी परेशानी आम नागरिक को उठानी पड़ती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कॉलोनी या प्लॉट में निवेश करने से पहले खरीदारों को कॉलोनाइजर लाइसेंस, स्वीकृत ले-आउट, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की अनुमति, भूमि अभिलेख और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच अवश्य करनी चाहिए।

प्रशासन के सामने विश्वसनीयता की चुनौती

दो वर्षों तक लगातार नोटिस जारी होने, अंतिम चेतावनियां देने और कार्रवाई की घोषणाओं के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन की विश्वसनीयता की है। यदि वास्तव में अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है तो उसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि कार्रवाई अधूरी रही है तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इसके पीछे क्या कारण रहे और जिम्मेदारी किसकी तय की गई।

यह मामला अब केवल अवैध प्लॉटिंग का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के समान अनुपालन और आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा का विषय बन चुका है।

क्या बोले जिम्मेदार

सिटी कोतवाली थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े ने बताया कि नगर पालिका परिषद मुंगेली द्वारा 16 मई 2026 को प्रस्तावित कार्रवाई के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिले से पुलिस जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन किसी कारणवश प्रस्तावित कानून व्यवस्था ड्यूटी स्थगित हो  गई। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग किसी भी प्रकार कि कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार था।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर ने बताया कि पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे “स्वर्ण वाटिका” नाम से नगर पालिका की एनओसी एवं आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना प्लॉटिंग और सीसी रोड का निर्माण कराया गया था। इस संबंध में पहले दो बार नोटिस जारी किए गए थे। निर्देशों का पालन नहीं होने पर अंतिम नोटिस भी दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अब संबंधित मामले में परिवार वाद न्यायालय में दायर किया जाएगा और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पार्षद प्रतिनिधि आयुष शुक्ला ने कहा कि नगर पालिका क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग का खेल किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भू-माफिया नियमों की अनदेखी कर लोगों की जीवनभर की जमा पूंजी से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी परियोजना के बिना वैधानिक अनुमति संचालित होने की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पिछले दो वर्षों में जारी नोटिसों के बावजूद कार्रवाई में हुई देरी की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

अतिरिक्त कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय का कहना है कि संबंधित मामले में विधिवत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जांच और प्रक्रिया पूरी करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमों के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे।

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