मानसून के चलते छत्तीसगढ़ के सभी टाइगर रिजर्व और अभयारण्य तीन माह के लिए बंद, जंगल सफारी पर पूर्ण रोक*
रायपुर, 19 जून 2026। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ वन विभाग ने राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों को आगामी तीन माह के लिए पर्यटकों हेतु बंद करने का निर्णय लिया है। मानसून सत्र के दौरान जंगल सफारी, पर्यटन वाहनों के प्रवेश तथा अन्य पर्यटन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह व्यवस्था आमतौर पर वर्षा ऋतु के दौरान लागू की जाती है, ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित और शांत वातावरण मिल सके तथा पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
वन विभाग के अनुसार बारिश के मौसम में जंगलों के भीतर स्थित कच्चे मार्ग और सफारी ट्रैक की स्थिति प्रभावित हो जाती है। कई स्थानों पर जलभराव, फिसलन और नदियों-नालों के उफान पर होने के कारण पर्यटकों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो जाती है। इसके अलावा लगातार वर्षा के कारण वन क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान जंगल सफारी को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है।
राज्य के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सहित विभिन्न अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं, जहां अब अगले तीन माह तक पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान वन विभाग द्वारा वन मार्गों के रखरखाव, संरक्षण कार्यों और वन्यजीवों की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वन अधिकारियों का कहना है कि मानसून का समय वन्यजीवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस मौसम में अधिकांश वन्यजीवों का प्रजनन काल चलता है तथा जंगलों में नई वनस्पतियों का विकास होता है। यदि इस दौरान पर्यटन गतिविधियां जारी रहें तो वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जैव विविधता के संरक्षण और वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह कदम आवश्यक माना जाता है।
छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र देशभर के पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। विशेष रूप से बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली भैंसा, हिरण और विभिन्न दुर्लभ पक्षी प्रजातियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। हालांकि अब उन्हें मानसून समाप्त होने तक इंतजार करना होगा। वन विभाग द्वारा मौसम और जंगलों की स्थिति का आकलन करने के बाद आगामी पर्यटन सत्र में सफारी सेवाओं को पुनः प्रारंभ किया जाएगा।
वन विभाग ने पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों से अपील की है कि वे प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी अभयारण्य या टाइगर रिजर्व में प्रवेश करने का प्रयास न करें तथा केवल आधिकारिक सूचना के बाद ही पर्यटन गतिविधियों की योजना बनाएं। विभाग ने यह भी कहा है कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में आम नागरिकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाने से वन्यजीवों को निर्बाध रूप से विचरण, प्रजनन और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि देश के अधिकांश राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्वों में वर्षा ऋतु के दौरान पर्यटन गतिविधियां सीमित अथवा बंद कर दी जाती हैं। छत्तीसगढ़ में भी यह व्यवस्था वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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