October 19, 2026

बिलासपुर) देशभर के साइबर फ्रॉड से जुड़ा म्यूल अकाउंट गैंग बेनकाब, अंबिकापुर से तीन गिरफ्तार

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साइबर ठगी की काली दुनिया में स्लीपर सेल बन चुके म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर बिलासपुर पुलिस ने ऐसा वार किया कि देशभर में फैले ऑनलाइन ठगों के नेटवर्क की परतें खुलने लगीं। तारबाहर थाना पुलिस ने अंबिकापुर से तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जिनके जरिए साइबर अपराधियों तक बैंक खातों की सप्लाई की जा रही थी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 60 से ज्यादा साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हैं। मामले में गिरफ्तार आरोपियों में नवनीत मिश्रा उर्फ विक्की पंडित पिता संजय मिश्रा उम्र 19 वर्ष निवासी नवापारा थाना गांधीनगर जिला सरगुजा, ऋषभ साहू पिता वीरेन्द्र साहू उम्र 24 वर्ष निवासी कम्पनी बाजार थाना कोतवाली अंबिकापुर और राजा घरानी पिता रंजन घरानी उम्र 22 वर्ष निवासी ग्राम डिगमा नेहरू नगर थाना गांधीनगर जिला सरगुजा शामिल हैं। पुलिस ने तीनों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं जिनकी तकनीकी जांच जारी है। पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब तारबाहर पुलिस ने 13 मई 2026 को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले आरोपी दीपेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया था। दीपेश के मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट ने पुलिस को सीधे अंबिकापुर तक पहुंचा दिया। जांच में सामने आया कि दीपेश और गिरफ्तार तीनों आरोपी व्हाट्सएप और मोबाइल कॉल के जरिए बैंक खातों की जानकारी साझा करते थे और कमीशन लेकर खातों को साइबर ठगी गिरोहों तक पहुंचाते थे। यही खाते देशभर में ऑनलाइन फ्रॉड की रकम लेने, ट्रांसफर करने और निकालने में इस्तेमाल किए जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क साइबर अपराधियों के लिए स्लीपर सेल की तरह काम कर रहा था, जिससे असली ठगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम ने अंबिकापुर में दबिश देकर तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया और पूछताछ में पूरा नेटवर्क सामने आ गया। थाना तारबाहर में अपराध क्रमांक 155/2026 के तहत धारा 318(4), 317(4), 3(5) और 112 बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज कर तीनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। अब पुलिस आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और उनसे जुड़े अन्य लोगों की गहराई से जांच कर रही है। बहरहाल, इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि साइबर ठगी अब सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक सीमित अपराध नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं जो आम लोगों के बैंक खातों को करोड़ों की ठगी का हथियार बना रहे हैं।

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