October 19, 2026

मानकों को ताक पर रखकर बन रहे मुंगेली के भव्य द्वार, अधिकारियों की चुप्पी और ठेकेदार की मनमानी से फूटा जनता का गुस्सा

0
1775554794228.png

मुंगेली में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल:करोड़ों की लागत से बन रहे स्वागत द्वारों में तय मानकों की अनदेखी,जनता ने डिप्टी सीएम अरुण साव से की निगरानी समिति की मांग

मुंगेली/प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव के गृह जिले मुंगेली में विकास की मुख्यधारा को गति देने के लिए करोड़ों रुपयों की सौगात दी गई है। श्री साव की मंशा के अनुरूप नगर के कायाकल्प के लिए भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है,जिसके तहत शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर भव्य स्वागत द्वारों का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि,इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी मानकों को लेकर अब शहर की जनता ने मोर्चा खोल दिया है और सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

3.63 करोड़ की लागत से बन रहे पांच भव्य द्वार

नगर पालिका परिषद मुंगेली के अंतर्गत शहर के पांच प्रमुख मार्गों पर स्वागत द्वारों के निर्माण के लिए शासन द्वारा अधोसंरचना मद से 3 करोड़ 63 लाख 73 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत रायपुर रोड से की गई है,जिसका ठेका मेसर्स रूप केशरी कंस्ट्रक्शन को दिया गया है। विभाग का लक्ष्य इन द्वारों के माध्यम से शहर को एक नई पहचान देना है,लेकिन धरातल पर हो रहा निर्माण कार्य जन अपेक्षाओं के विपरीत नजर आ रहा है।

लाखों खर्च,फिर भी तय मानकों की अनदेखी

रायपुर रोड पर निर्माणाधीन स्वागत द्वार को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष व्याप्त है। आम जनता का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से बन रहे इन द्वारों में तय तकनीकी मानकों और डिजाइन की सुध नहीं ली जा रही है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री और उसकी फिनिशिंग देखकर स्पष्ट होता है कि गुणवत्ता के साथ समझौता किया जा रहा है। शहरवासियों का सवाल है कि क्या यह निर्माण आने वाले समय में सुरक्षित और टिकाऊ रह पाएगा?

अधिकारियों की उदासीनता और ठेकेदार की मनमानी

जनता के बीच चर्चा का मुख्य विषय नगर पालिका परिषद के अधिकारियों का रवैया बना हुआ है। नागरिकों का कहना है कि सरकार विकास के लिए पैसा देती है,लेकिन उन कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है,वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन केवल कार्यालयों में बैठकर कर रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि अधिकारी फील्ड पर जाकर निरीक्षण करने के बजाय ठेकेदारों से ‘टेलीफोनिक चर्चा’ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। अधिकारियों की इसी उदासीनता का लाभ उठाकर ठेकेदार मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं और शासन के बजट का दुरुपयोग कर अपनी जेबें भरने में लगे हैं।

निगरानी समिति के गठन की उठी मांग

भ्रष्टाचार की आशंका और खराब गुणवत्ता को देखते हुए मुंगेली की जागरूक जनता ने अब सीधे उपमुख्यमंत्री अरुण साव से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। जनता की मांग है कि विकास कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक,विशेष निगरानी समिति,का गठन किया जाए। यह समिति निर्माण स्थल पर जाकर मानकों की जांच करे और ठेकेदारों को कड़े निर्देश दे। नागरिकों का कहना है कि यह जनता के टैक्स का पैसा है और इसका सदुपयोग तभी संभव है जब कार्य गुणवत्तायुक्त हो और भ्रष्टाचार मुक्त हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed