October 19, 2026

आजादी के 78 साल बाद भी रेल को तरसता मुंगेली:कागजों में सिमट कर रह गई करोड़ों की ‘कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़’ रेल लाइन परियोजना

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मुंगेली/छत्तीसगढ़ का मुंगेली जिला आज भी आधुनिक भारत की सबसे बुनियादी जरूरत यानी ‘रेल’ से महरूम है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना चुका है,लेकिन मुंगेली के निवासियों के लिए ट्रेन की सीटी आज भी एक अधूरा सपना बनी हुई है। क्षेत्र के विकास की जीवनरेखा मानी जाने वाली कटघोरा–मुंगेली–डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना प्रशासनिक फाइलों और चुनावी वादों के बीच कहीं खो गई है।

फाइलों में कैद विकास का पहिया

करीब 800 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना पिछले आठ वर्षों से चर्चा में है। बताया जा रहा है कि साल 2024 के बजट में इस परियोजना के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया,लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी है। सर्वे और निरीक्षण के कई दौर पूरे होने के बावजूद भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक मंजूरी की सुस्त रफ्तार ने इस योजना को ‘अधर’ में लटका दिया है।

क्यों जरूरी है यह रेल लाइन?

मुंगेली जिला मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। यहाँ की अर्थव्यवस्था धान की पैदावार पर टिकी है। रेल सुविधा न होने के कारण यहाँ के किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है
किसानों को लाभ:रेल मार्ग जुड़ने से किसान अपनी उपज को कम लागत में देश की बड़ी मंडियों तक भेज सकेंगे।
औद्योगिक विकास:माल परिवहन आसान होने से क्षेत्र में नए उद्योगों और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
रोजगार के अवसर:बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटन और व्यापार के नए द्वार खुलेंगे।

बिलासपुर-रायपुर पर निर्भरता की मजबूरी

वर्तमान में मुंगेली के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए मजबूरन 50 से 100 किलोमीटर दूर बिलासपुर या रायपुर जाना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है,बल्कि यात्रियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह लाइन शुरू होती है,तो सैकड़ों गांवों की तस्वीर बदल जाएगी।

चुनावी वादा बनाम जमीनी हकीकत

स्थानीय नागरिकों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि लोकसभा,विधानसभा सहित हर चुनाव में नेताओं द्वारा रेल लाइन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाता हैं,और आम जनता को भरोसा दिलाते हुए बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं,लेकिन मतदान खत्म होते और नेताओं को सत्ता मिलते ही मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है। बार बार के छलावे से परेशान होने के बाद अब जिले की आम जनता का केवल एक ही मांग है: “ठोस कार्ययोजना और स्पष्ट समयसीमा।”
आम जनता का कहना है कि मुंगेली जिले के लोगों को वर्षों से रेल सुविधा का इंतजार है। अगर यह रेल लाइन बनती है तो पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है। अब हमें वादे नहीं,पटरियां चाहिए।”

देश,प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के बावजूद परियोजना अधर में

जिले के लोगो का ये भी कहना है कि अभी तो देश में और प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार है और इस परियोजना की मंजूरी केंद्र की भाजपा के सरकार द्वारा ही गई थी लेकिन इस महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी मिलने के इतने सालों बाद भी कार्य में किसी प्रकार से प्रगति नहीं होना आम जनता के लिए कुठाराघात है बहरहाल मुंगेली की जनता का  यह मांग केवल एक रेल लाइन की नहीं,बल्कि क्षेत्र के भविष्य और विकास की मांग है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को कब गंभीरता से लेती है और कब मुंगेली के प्लेटफॉर्म पर पहली ट्रेन दस्तक देती है।

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