October 19, 2026

कृषक सहयोग संस्थान द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत लोरमी में सेवाप्रदाता समन्वय बैठक सम्पन्न

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कृषक सहयोग संस्थान द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत लोरमी में सेवाप्रदाता समन्वय बैठक सम्पन्न

कृषक सहयोग संस्थान द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत लोरमी में सेवाप्रदाता समन्वय बैठक सम्पन्न


मुंगेली। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क की भागीदार संस्था कृषक सहयोग संस्थान द्वारा लोरमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बैगाकापा में सेवाप्रदाता समन्वय बैठक का आयोजन किया गया। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को गति प्रदान करने हेतु आयोजित इस बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी (एलएडीसी) तथा पुलिस विभाग से सहायक उपनिरीक्षक रघुवीर सिंह राजपूत विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत को वर्ष 2030 तक पूर्णतः बाल विवाह मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को ग्रामीण स्तर पर मजबूत करना था। बैठक में यह तथ्य उजागर हुआ कि यद्यपि पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन लगातार प्रयासरत हैं, फिर भी पंचायतें अभी पूरी तरह बाल विवाह मुक्त नहीं हो सकी हैं। अतः सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास से ही बाल विवाह की रोकथाम संभव हो पाएगी।

कृषक सहयोग संस्थान के जिला समन्वयक ललित सिन्हा ने बताया कि समाज में कई प्रमुख सामाजिक कुरीतियाँ आज भी विद्यमान हैं, जिनमें बाल विवाह, बाल श्रम एवं बाल यौन शोषण प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है—कमजोर बच्चा जन्म लेना, मातृ मृत्यु का जोखिम बढ़ना तथा परिवार पर अचानक आर्थिक बोझ पड़ना जैसी समस्याएँ आम हैं। उन्होंने अपील की कि लड़कियों को भी लड़कों की तरह उच्च शिक्षा दी जाए और शादी सरकार द्वारा निर्धारित आयु पर ही की जाए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी ने बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कराना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में 2 वर्ष तक की कारावास तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाल विवाह में शामिल कराने वाले या सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों—रिश्तेदार, पंडित, मौलवी, फादर, बैंड-बाजा दल, भोजन बनाने वाले, आयोजन स्थल संचालक—सभी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में उपस्थित सरपंचों ने आश्वस्त किया कि वे अपनी-अपनी पंचायतों में बैठक बुलाकर ग्रामीणों को इस संबंध में जागरूक करेंगे तथा संस्था को भी आमंत्रित करेंगे। बैठक के अंतर्गत सभी सरपंचों को विवाह पंजी भी वितरित किया गया, जिसका उद्देश्य पंचायत एवं आश्रित ग्रामों में होने वाले प्रत्येक विवाह का सटीक रिकॉर्ड रखना है। सरपंचों को निर्देशित किया गया कि किसी भी विवाह से पूर्व वर-वधू के जन्म प्रमाणपत्र, 10वीं–12वीं की अंकसूची अथवा स्कूल प्रमाणपत्र का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।

कार्यक्रम के समापन पर संस्था के कार्यकर्ता सियाराम कश्यप ने सभी उपस्थितों को शपथ दिलाई कि वे अपने क्षेत्र में बाल विवाह रोकने हेतु सक्रिय भूमिका निभाएँगे। अंत में संस्था की ओर से रत्न कश्यप ने सभी सरपंचों, सचिवों एवं उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक के माध्यम से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में अवश्य देखने को मिलेंगे।

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