गौरव पथ पर सवालों की बौछार: पेड़ों की बलि और करोड़ों का खेल
मुंगेली । नगर पालिका द्वारा शहर के सौंदर्यीकरण और गौरव पथ निर्माण के नाम पर लगभग पाँच करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा काम अब सवालों के घेरे में है। जिस योजना को शहर की पहचान और विकास का प्रतीक बताया जा रहा था, वही अब भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और पर्यावरण दोहन का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। आम जनता और व्यापारी जहाँ इस काम की वास्तविक जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं ठेकेदार और पालिका प्रशासन की लापरवाही ने आक्रोश को और गहरा कर दिया है।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
गौरव पथ डिवाइडर का निर्माण शुरू होते ही स्थानीय नागरिकों ने कार्य की गुणवत्ता को लेकर संदेह जताया। सीमेंट-कंक्रीट की मिलावट, कमजोर डिवाइडर और अधूरी प्लानिंग साफ दिख रही है। पालिका के वही जनप्रतिनिधि, जिन्होंने पहले बने डिवाइडर को तोड़वाकर अपनी पीठ थपथपाई थी, आज मौन साधे बैठे हैं। करोड़ों की लागत से बनने वाला यह काम महज कागजों तक सिमटा प्रतीत हो रहा है।
पेड़ों की बलि पर मचा हंगामा
गौरव पथ डिवाइडर में लगे बड़े-बड़े हरे-भरे पेड़ इस परियोजना की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। नगर पालिका इंजीनियर का दावा है कि सभी पेड़ों को सुरक्षित निकालकर अन्यत्र प्रत्यारोपित किया जाएगा। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
हाल ही में रेहूटा ग्राम में बड़ी संख्या में पेड़ पड़े हुए पाए गए, जिन्हें न तो रोपा गया और न ही उनकी देखभाल की कोई व्यवस्था की गई। कुछ पेड़ों को पेंडाराकापा भेजने की बात भी सामने आई, लेकिन वहाँ भी हालात निराशाजनक हैं। पेड़ या तो सूख चुके हैं या ग्रामवासी उन्हें काटकर ले जा रहे हैं।
ठेकेदार के सुपरवाइजर ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका काम केवल पेड़ निकालना है, लगाना पालिका की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर फेंक दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह अमानवीय कृत्य बंद नहीं हुआ तो ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान की धज्जियाँ
राज्य शासन ने हरित क्रांति और पर्यावरण संतुलन के लिए “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे महत्वाकांक्षी अभियान चलाए थे। लेकिन मुंगेली का गौरव पथ प्रकरण इस अभियान की गंभीरता पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। जब सरकारी परियोजनाएँ ही पेड़ों का जीवन छीन लें, तो आम जनता से पर्यावरण संरक्षण की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
विकास की जगह विनाश का प्रतीक
गौरव पथ का उद्देश्य शहर को सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप देना था। लेकिन आज यह परियोजना विवाद, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की मिसाल बनती जा रही है। करोड़ों की लागत से बने डिवाइडर कमजोर और घटिया दिख रहे हैं। पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
यदि प्रशासन चाहता, तो यह काम पूरी पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण के साथ किया जा सकता था। लेकिन लापरवाही और उदासीनता ने यह साबित कर दिया है कि प्राथमिकता विकास नहीं, बल्कि ठेकेदार और जनप्रतिनिधियों के निजी स्वार्थ हैं।
जनता पूछ रही है सवाल
पाँच करोड़ की लागत से हो रहे इस काम का क्या औचित्य है?
जब सड़क और डिवाइडर की स्थिति ठीक-ठाक थी, तो नए निर्माण की जरूरत क्यों? पेड़ों को बचाने और प्रत्यारोपित करने के वादे पर अमल क्यों नहीं हुआ?
स्थानीय नागरिकों का आक्रोश



इस सम्बन्ध में मुख्य नगरपालिका अधिकारी होरी सिंह का कहना है की गौरव पथ को तोड़कर नया बनाया जा रहा है। डिवाइडर में लगा कुछ पौधा को शिप्ट किया गया है। वहीं नगरपालिका के पास उतना आधुनिक मशीन नहीं है कि सभी पेड़ को उखाड़ कर दूसरे जगह शिप्ट किया जा सके।
इस पुरे मामले में इंजीनियर ने कि जितने पेड़ निकाले जाएंगे उतने ही वापस लगाए जाएं। जिसमें से कुछ पेड को रेहुटा में लगाया गया है वही कुछ को पेन्डाराकापा भेजा गया है।
नेमी चंद वर्मा इंजीनियर नगर पालिका मुंगेली

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