October 19, 2026

भिलाई की इशिका सिंह ने रचा इतिहास – सिडनी विश्वविद्यालय में मिली बीटा गामा सिग्मा की प्रतिष्ठित सदस्यता, शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सम्मान

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भिलाई नगर ।  इस्पात नगरी भिलाई की बेटी और भारतीय मूल की प्रतिभाशाली छात्रा इशिका सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सिडनी विश्वविद्यालय में अध्ययनरत इशिका को व्यवसायिक शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्था बीटा गामा सिग्मा की सदस्यता प्रदान की गई है। यह सदस्यता केवल उन छात्रों को दी जाती है, जो अपने बैच के शीर्ष 10% में शामिल होते हैं और जिन्होंने शिक्षा, नेतृत्व व नैतिक मूल्यों में असाधारण प्रदर्शन किया हो।

बीटा गामा सिग्मा का महत्व बीटा : गामा सिग्मा (Beta Gamma Sigma) दुनिया के शीर्ष बिजनेस स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को दिया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय मानद व्यवसाय सम्मान है। यह संस्था 1913 में स्थापित हुई थी और वर्तमान में विश्वभर में इसके लगभग 9 लाख सदस्य हैं, जबकि भारत में यह संख्या 8,000 से अधिक है। इसके सदस्य प्रतिष्ठित कंपनियों, सरकारी संस्थानों, शोध संगठनों और विश्वविद्यालयों में नेतृत्व भूमिका निभा रहे हैं। इस सदस्यता को प्राप्त करना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह छात्र के पेशेवर जीवन में प्रतिष्ठा और अवसरों के नए द्वार खोलता है।

इशिका का चयन और समारोह : सिडनी विश्वविद्यालय में इशिका के चयन का आधार उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, नेतृत्व कौशल और उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि बीटा गामा सिग्मा की सदस्यता उनके भविष्य के करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इशिका को यह सम्मान 29 अक्टूबर 2025 को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा।

परिवार और शुभचिंतकों की खुशी : इशिका के पिता एवं भिलाई ट्रक टेलर्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव मलकित सिंह लल्लू, एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, शिक्षकों, रिश्तेदारों और मित्रों ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। इशिका ने भी अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया।
प्रेरणा का स्रोत : इशिका की उपलब्धि उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिश्रम और लगन से अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं। उनका यह सम्मान न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है, जो यह साबित करता है कि प्रतिभा और समर्पण के बल पर भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।

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