10 साल अंधेरे में कटे, अब खून से लिखी 500 चिट्ठियां; 48 गांवों की पीएम मोदी से आखिरी गुहार
बिजली, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों ने खून को बनाया स्याही, प्रशासन के अधूरे वादों पर उठे सवाल
गरियाबंद, 10। जब एक दशक तक इंतजार, हजारों आवेदन और अनगिनत गुहार भी अंधेरा दूर नहीं कर सकीं, तब 48 गांवों के लोगों ने अपने ही खून को स्याही बना लिया। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक स्थित राजापड़ाव क्षेत्र में बुधवार को ऐसा भावुक और अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वर्षों से वंचित ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 500 से अधिक पत्र अपने खून से लिखकर इंसाफ की गुहार लगाई।

राजापड़ाव क्षेत्र की आठ पंचायतों के 48 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण जय अंबेडकरवादी युवा संगठन और किसान संघर्ष समिति राजापड़ाव क्षेत्र के बैनर तले अडगढ़ी गौठान में एकत्र हुए। ग्रामीणों का कहना है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में होने का हवाला देकर पिछले 10 वर्षों से बिजली, सड़क, पुल-पुलिया और अन्य विकास कार्यों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की अनापत्ति का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जनवरी 2026 में जिला प्रशासन ने छह महीने के भीतर पूरे क्षेत्र में विद्युतीकरण का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन जून आ जाने के बावजूद जमीन पर कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। लंबे संघर्ष के बाद केवल तीन पंचायतों के मुख्य गांवों तक बिजली पहुंची है, जबकि उनके आश्रित पारा-टोले आज भी अंधेरे में हैं। पांच पंचायतों में अब तक बिजली की एक भी लाइन नहीं पहुंच सकी है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और ग्रामीणों के रोजगार पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि खून से पत्र लिखने की जानकारी पहले ही प्रशासन को दे दी गई थी और स्वास्थ्य विभाग से चिकित्सकीय सहायता भी मांगी गई थी, लेकिन कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद नई और सिंगल-यूज सिरिंज की मदद से सीमित मात्रा में रक्त निकालकर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और एनटीसीए के नाम पत्र लिखे गए।
खून से सने पोस्टकार्ड हाथों में लिए ग्रामीणों ने साफ कहा कि यह सरकार के खिलाफ आंदोलन नहीं, बल्कि वर्षों से अनसुनी रह गई आवाज को देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की मजबूरी है। उनका कहना है कि वर्ष 2006 से अब तक हजारों आवेदन, ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन समाधान आज भी अधूरा है।

The News Related To The News Engaged In The Hasdeo Pravah Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
