October 20, 2026

जमीन के नाम पर 13 लाख की जालसाजी, कोर्ट ने दिए FIR के आदेश

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फर्जी अध्यक्ष बनकर किया इकरारनामा, सिविल लाइन पुलिस को एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने निर्देश

बिलासपुर। शहर के पॉश इलाके जरहाभाठा में जमीन बेचने के नाम पर लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC) हितेश कुमार बलेजा की अदालत ने मामले को गंभीर आपराधिक कृत्य मानते हुए थाना सिविल लाइन पुलिस को आरोपी के खिलाफ एक सप्ताह के भीतर FIR दर्ज कर विवेचना प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला केवल अनुबंध उल्लंघन नहीं बल्कि पूर्व नियोजित धोखाधड़ी का प्रतीत होता है।

सोसायटी की जमीन बताकर किया सौदा

प्रकरण के अनुसार आरोपी जयदीप राबिन्सन ने स्वयं को “यूनाईटेड क्रिश्चन मिशन सोसायटी” का अध्यक्ष एवं मुख्तयारनामा धारक बताते हुए जरहाभाठा स्थित प्लॉट नंबर 48/2 की लगभग 1130 वर्गफुट भूमि बेचने का प्रस्ताव दिया था। इस संबंध में 23 नवंबर 2017 को परिवादी संजय लूथर एवं अजय लूथर के साथ इकरारनामा निष्पादित किया गया।

परिवादियों का आरोप है कि आरोपी ने खुद को अधिकृत पदाधिकारी बताकर विश्वास में लिया और जमीन की रजिस्ट्री कराने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम प्राप्त कर ली।

मिली जानकारी के अनुसार…

मिली जानकारी के अनुसार, सौदे के दौरान परिवादियों ने आरोपी को अलग-अलग किश्तों में कुल 13 लाख 10 हजार रुपये का भुगतान किया था। इसमें 23 नवंबर 2017 को 10 लाख रुपये नगद बयाना राशि के रूप में दिए गए। इसके बाद 26 दिसंबर 2017 को 2 लाख 50 हजार रुपये चेक के माध्यम से तथा 60 हजार रुपये नगद दिए गए।

बताया जा रहा है कि रकम लेने के बाद आरोपी लगातार जमीन की रजिस्ट्री टालता रहा। वर्षों तक इंतजार करने के बाद परिवादियों ने विधिक नोटिस भेजा और दस्तावेजों की जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी न तो संबंधित सोसायटी का अध्यक्ष है और न ही उसे उक्त जमीन बेचने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त था।

अदालत ने माना प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का उद्देश्य शुरुआत से ही छलपूर्वक धन प्राप्त करना हो, तो मामला केवल संविदा भंग नहीं माना जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी को पहले से यह जानकारी थी कि उसे भूमि विक्रय का अधिकार नहीं है, इसके बावजूद उसने स्वयं को अधिकृत बताकर सौदा किया।

अदालत ने थाना प्रभारी सिविल लाइन को निर्देशित किया कि आरोपी के खिलाफ प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की जाए तथा एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।

> “आरोपी द्वारा किया गया संव्यवहार केवल संविदा भंग न होकर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। अतः थाना प्रभारी समुचित धाराओं में अपराध दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करें।”
— न्यायालयीन आदेश



16 जून को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने परिवादी पक्ष को आवेदन एवं संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां जमा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उन्हें पुलिस को उपलब्ध कराया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 16 जून 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन पुलिस को FIR की प्रति एवं प्रारंभिक कार्रवाई रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी।

शहर में चर्चा का विषय बना मामला

जरहाभाठा जैसे महंगे और विकसित इलाके में जमीन के नाम पर हुई कथित ठगी का मामला सामने आने के बाद शहर में इसकी व्यापक चर्चा है। अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अब पुलिस कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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