सुदूर वनांचल ग्राम लमनी में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित
“समय पर जांच और सही जानकारी से बच सकती है अनमोल जिंदगी”
मुंगेली-विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर कलेक्टर कुंदन कुमार के निर्देशानुसार तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डां. शीला शाहा एवं डीपीएम गिरीश कुर्रे, बी.एम.ओ. कमलेश खैरवार के मार्गदर्शन में
आदिवासी एवं सुदूर वनांचल ग्राम लमनी में एनसीडी कार्यक्रम अंतर्गत निःशुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं जांच शिविर का आयोजन किया गया।जिले के सुदूर वनांचल जनजाति ग्राम लमनी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर व जागरूक कर कैम्प लगा कर 78 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई। शिविर में 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी ग्रामीणों का रक्तचाप एवं मधुमेह परीक्षण कर स्वास्थ्य परामर्श एवं निःशुल्क दवाईयां दी गई। ग्रामीण अंचल एटीआर में शिविर लगाने का उदेश्य लोगो को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर स्वास्थ्य सेवा से जोड़ कर उन्हें उन्हें ईलाज के लिए अस्पताल पहुंच कर ईलाज कराकर स्वस्थ रखना है। इस शिविर में बीपी, शुगर, कुष्ठ टी.बी. डेगू, मलेरिया, नाक, कान गला आॅखों की जानकारी लेकर निःशुल्क दवाईयां दी गई। शिविर में पहले से बीपी के 10 केस मिले जिनका ईलाज चल रहा था, हाई बीपी के 12, बीपी मध्यम स्तर में 04 के साथ 40 लोगो का बीपी सामान्य पाया गया है। शुगर के मामले में 04 मरीज मिले। टी.बी. से मुक्ति अभियान के बार में परीक्षण में दो केस सामने आये है। जिन्हों ने टी.बी. से मुक्ति पायी है। ग्रामीण क्षेत्र में यह मुक्ति उल्लेखनीय है।
शिविर में गैर संचारी रोग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनीष बंजारा ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य की प्रति जागरूक करते हुए कहा कि सुदुर ग्रामीण अंचल जनजाति के लोगो को नशा से मुक्ति के लिए प्रेरित किया और कहा कि आप नशे से अपने आप को दूर करे तभी आपका स्वास्थ्य ठीक रह सकता है। जिस पर बहुत से लोगो ने नशे से दूर रहने का संकल्प जताया और कहा कि अपने स्वास्थ्य के लिए अस्पताल जरूर जायेगे। महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के बारे में विस्तत जानकारी देते हुए। इससे होने वाले संक्रमण से बचने के उपाय बताये। उल्लेखनीय है कि जनजाति ग्रामीण ़क्षेत्रों में, जंगल में रहने वाले लोगोे का पारम्पारिक विविध आहार अब धीरे-धीरे कम हो रहे है। यदि सही जागरूकता के साथ स्थानीय खादय पदार्थो के महत्व का समझा कर बढ़ावा दिया जाए तो कुपोषण कम करने में बड़ी राहत मिलेगी।
उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के प्रति जागरूक करते हुए सरल भाषा में इसके कारण, बचाव एवं आपातकालीन स्थिति में किए जाने वाले आवश्यक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि कई बार इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन यह हृदय रोग, ब्रेन स्ट्रोक एवं किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
डॉ. बंजारा ने ग्रामीणों से नियमित रक्तचाप जांच कराने, कम नमक सेवन करने, तंबाकू एवं शराब से दूर रहने, संतुलित भोजन एवं नियमित व्यायाम अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो तो इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार से गंभीर खतरे को टाला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 22-31 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं तथा हर 4 में 1 वयस्क हाई बीपी का मरीज है। चिंताजनक तथ्य यह है कि केवल 12 प्रतिशत मरीजों का रक्तचाप नियंत्रण में है, जबकि अधिकांश लोग या तो बीमारी से अनजान हैं या नियमित उपचार नहीं लेते। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप हृदय रोग, ब्रेन स्ट्रोक एवं असमय मृत्यु का प्रमुख कारण बनता जा रहा है।
उच्च रक्तचाप से बचाव हेतु उन्होंने नियमित जांच एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि – 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित जांच कराएं, प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करें, रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलें, तंबाकू एवं शराब से दूर रहें, वजन नियंत्रित रखें एवं तनाव कम करें, पर्याप्त नींद लें, चिकित्सक द्वारा दी गई दवाइयों का नियमित सेवन करें, क्योंकि दवा बंद करना स्ट्रोक एवं हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही जीवनशैली ही उच्च रक्तचाप से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। शिविर के दौरान ग्रामीणों को नशामुक्ति का सशक्त संदेश भी दिया गया। साथ ही एनीमिया, कुपोषण, मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य तथा महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आदिवासी ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया कि दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना शासन की प्राथमिकता है और प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य विभाग के लिए समान महत्व है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य शिविर के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे उपयोगी एवं जागरूकता बढ़ाने वाला प्रयास बताया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, एमटी एवं मितानिनों की विशेष भूमिका रही।/ -डॉ. मनीष बंजारा

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