October 19, 2026

विडंबना की हद: बैंक ने ‘खाताधारक को लाओ’ कहा, भाई कंधे पर बहन का कंकाल लेकर पहुंच गया

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ओडिशा के क्योंझर में चौंकाने वाला मामला, 3 किमी पैदल चलकर बैंक पहुंचा शख्स; प्रशासन ने बाद में दिलाया भरोसा

क्योंझर। ओडिशा के क्योंझर जिले से मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक आदिवासी युवक, जीतू मुंडा, अपनी मृत बहन का कंकाल कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गया। वजह थी—बैंक से पैसे निकालने के लिए बार-बार ‘खाताधारक को लाने’ की शर्त।

जानकारी के अनुसार, जीतू मुंडा अपनी बहन कालरा मुंडा के बैंक खाते से 20 हजार रुपये निकालना चाहता था। वह कई बार बैंक गया और कर्मचारियों को अपनी बहन की मौत के बारे में बताया भी, लेकिन हर बार उसे खाताधारक को साथ लाने के लिए कहा गया। मदद न मिलने से परेशान होकर उसने बहन की कब्र खोदी और कंकाल निकालकर बैंक पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि जीतू करीब 3 किलोमीटर तक कंधे पर कंकाल लेकर पैदल चला और मल्लिपसी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक शाखा के बरामदे में उसे रख दिया। यह दृश्य देखकर बैंक में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

पुलिस के मुताबिक, जीतू मुंडा अशिक्षित है और उसे बैंकिंग या कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं थी। थाना प्रभारी किरण प्रसाद साहू ने बताया कि उसे यह भी नहीं पता था कि ‘नॉमिनी’ या ‘कानूनी वारिस’ क्या होता है। वहीं, बैंक अधिकारी भी उसे सही प्रक्रिया समझाने में विफल रहे।

पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और जीतू को आश्वस्त किया कि उसकी बहन के खाते से पैसे निकलवाने में पूरी मदद की जाएगी। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में कंकाल को दोबारा कब्रिस्तान में दफना दिया गया।

दरअसल, डियानाली गांव निवासी जीतू मुंडा की बहन कालरा मुंडा का निधन 26 जनवरी 2026 को हो गया था। खाते में जमा राशि पर नामांकित पति और बेटे की भी पहले ही मौत हो चुकी है, जिससे जीतू ही एकमात्र दावेदार बचा है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण यह राशि उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।

यह घटना न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी किस तरह एक आम नागरिक को असहाय स्थिति में धकेल देती है।

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