अमर शहीद धनंजय सिंह राजपूत की 25वीं शहादत पर नम हुईं आंखें; कलेक्टर-एसएसपी ने किया वीर परिवारों का सम्मान
मुंगेली: राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत
मुंगेली: राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत के 25वें शहादत दिवस (रजत जयंती शहादत समारोह) का आयोजन रविवार को विकासखंड मुंगेली के ग्राम पंडरभट्ठा स्थित शहीद स्मारक परिसर में अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और गरिमामय वातावरण में किया गया। पूर्व सैनिक संगठन मुंगेली के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में जिले के शहीद परिवार, पूर्व सैनिक, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने भाग लेकर वीर सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
एसएसपी भोजराम पटेल ने कहा कि शहीद धनंजय सिंह राजपूत का जीवन युवाओं के लिए साहस, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की अमिट मिसाल है। केवल शहीदों को याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक को अपने कार्यों के माध्यम से देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।
डीएफओ अभिनव कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि देश के वीर सैनिकों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। शहीदों की स्मृति को सहेजना और उनके सम्मान में पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य करना समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिक से अधिक पौधरोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया।
16 जुलाई 2001 को हुए थे शहीद
देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। कई लोगों की आंखें नम हो गईं तो वहीं बच्चों के उत्साह और जोश ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया।
निःशुल्क सैन्य प्रशिक्षण से सैकड़ों युवाओं का सपना हुआ साकार
कार्यक्रम में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा जून 2022 से मुंगेली स्टेडियम में युवाओं के लिए संचालित निःशुल्क सैन्य प्रशिक्षण अभियान की उल्लेखनीय उपलब्धियां भी साझा की गईं। त्रिभुवन यादव के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित युवाओं में वर्ष 2023 में 27, 2024 में 29, 2025 में 37 तथा 2026 में अब तक 22 युवाओं का भारतीय सेना (अग्निवीर) में चयन हो चुका है। इसके अलावा प्रतिवर्ष 25 से 30 युवाओं का चयन एसएससी जीडी एवं विभिन्न पैरामिलिट्री बलों में भी हो रहा है। इस उपलब्धि पर उपस्थित जनसमुदाय ने तालियों की गड़गड़ाहट से संगठन का उत्साहवर्धन किया।
प्रशासन के समक्ष रखी मांगें:
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कलेक्टर कुन्दन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) भोजराम पटेल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डीएफओ अभिनव कुमार, जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे, जिला सैनिक कल्याण संयोजक बिलासपुर योगराम बावने मौजूद रहे। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगान के सामूहिक गायन से हुआ, जिसके बाद शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत का राष्ट्र के प्रति दिया गया सर्वोच्च बलिदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा। आज देश का तिरंगा जिस सम्मान और गौरव के साथ लहरा रहा है, उसके पीछे हमारे सैनिकों का त्याग, समर्पण और अदम्य साहस है। सैनिकों की देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। समाज का दायित्व है कि वह सैनिकों और उनके परिवारों का हर परिस्थिति में सम्मान और सहयोग करे। कलेक्टर ने शहीद परिवारों एवं पूर्व सैनिकों को जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया।
समारोह के दौरान पूर्व सैनिक संगठन ने जिला प्रशासन के समक्ष मुंगेली स्टेडियम में युवाओं के प्रशिक्षण के लिए मिट्टी का रनिंग ट्रैक निर्माण कराने की मांग रखी। साथ ही जर्जर हो चुके शहीद स्मारक के पुनर्निर्माण, परिसर में शौचालय निर्माण तथा पूरे क्षेत्र में फेंसिंग कराने की मांग भी प्रशासन के समक्ष रखी गई, ताकि स्मारक की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे।
परिजनों का सम्मान और पौधरोपण
रजत जयंती समारोह के अवसर पर कलेक्टर एवं एसएसपी सहित सभी अतिथियों ने उनके परिवारजनों को शॉल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही जिले के पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित कर उनके राष्ट्रसेवा के योगदान को नमन किया गया।
इस अवसर पर कलेक्टर ने बादाम का तथा एसएसपी ने कटहल का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शहीदों की स्मृति को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत की 25वीं शहादत पर आयोजित यह समारोह केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, वीरता, त्याग और आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त संदेश बनकर सामने आया। कार्यक्रम में मंच संचालन सूरज शर्मा ने किया।
पूर्व सैनिक संगठन मुंगेली के अध्यक्ष त्रिभुवन यादव ने कार्यक्रम में शहीद धनंजय सिंह राजपूत के जीवन और अंतिम युद्ध का मार्मिक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंडरभट्ठा के निवासी धनंजय सिंह राजपूत वर्ष 1993 में भारतीय सेना की 64 कैवलरी में भर्ती हुए थे। बाद में उन्हें 24 राष्ट्रीय रायफल में नियुक्त किया गया, जहां वे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान में सक्रिय रहे।
15 जुलाई 2001 की रात आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान वीर धनंजय सिंह राजपूत गंभीर रूप से घायल हो गए और 16 जुलाई 2001 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। 19 जुलाई 2001 को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव पंडरभट्ठा में अंतिम संस्कार किया गया। आज उसी स्मारक स्थल पर उनकी रजत जयंती शहादत समारोह आयोजित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। प्रदेश संयोजक, पूर्व सैनिक ने बताया कि राष्ट्र की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता और ऐसे वीर सपूत सदैव अमर रहते हैं।






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