हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दृष्टिबाधित पीटीआई शिक्षकों की नौकरी नहीं छीन सकती सरकार
छत्तीसगढ़
(बिलासपुर)
भर्ती के बाद नियम बदलकर सेवा समाप्त करना मनमाना, बर्खास्तगी आदेश रद्द; 30 दिन में बहाली और पूरा बकाया वेतन देने के निर्देश
० बिलासपुर, । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिव्यांग कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि भर्ती विज्ञापन में किसी विशेष दिव्यांगता को अयोग्य घोषित नहीं किया गया है, तो चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति के बाद सरकार किसी प्रशासनिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने इस तरह की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए दो दृष्टिबाधित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया है।
जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी- की एकलपीठ ने शिक्षक (शारीरिक शिक्षा) पद पर नियुक्त दृष्टिबाधित शिक्षक -शिव शंकर साहू- और -नील कुमारी- की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस और बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया।
क्या है मामला?
संचालनालय लोक शिक्षण, रायपुर ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान तो था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि किन श्रेणियों के दिव्यांग अभ्यर्थी इन पदों के लिए अपात्र होंगे।
40 प्रतिशत दृष्टिबाधित -शिव शंकर साहू- और -नील कुमारी- ने शिक्षक (शारीरिक शिक्षा) पद के लिए आवेदन किया। दोनों ने चयन प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 24 अगस्त 2021 को नियुक्ति प्राप्त की और नियमित रूप से सेवाएं दे रहे थे।
करीब डेढ़ वर्ष बाद, 19 जनवरी 2023 को संयुक्त संचालक (शिक्षा), बिलासपुर ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। विभाग ने एक प्रशासनिक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पीटीआई शिक्षक पद के लिए केवल एक हाथ से दिव्यांग अथवा कम सुनने वाले अभ्यर्थी ही पात्र हैं। इसके आधार पर शिव शंकर साहू को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया, जबकि नील कुमारी की सेवाएं 6 फरवरी 2023 को समाप्त कर दी गईं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि -दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016- तथा -सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों- के अनुसार संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान करता है और दिव्यांग व्यक्तियों के साथ भेदभाव की अनुमति नहीं देता।
अदालत ने यह भी कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग के वर्ष 2014 के परिपत्र के अनुसार विभाग दिव्यांगों के लिए अवसरों का विस्तार कर सकता है, लेकिन पहले से निर्धारित पात्रता या आरक्षित पदों को बाद में कम नहीं कर सकता। यदि भर्ती प्रक्रिया में विभाग ने किसी अभ्यर्थी को पात्र मानकर नियुक्ति दी है, तो बाद में अपनी प्रशासनिक त्रुटि का दायित्व कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता।
कोर्ट के निर्देश
हाईकोर्ट ने -शिव शंकर साहू- को जारी कारण बताओ नोटिस रद्द करते हुए उन्हें सेवा में बने रहने की अनुमति दी है। वहीं -नील कुमारी- की बर्खास्तगी को अवैध ठहराते हुए आदेश निरस्त कर दिया गया है।
अदालत ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के -30 दिनों के भीतर नील कुमारी को पुन: सेवा में बहाल किया जाए- तथा बर्खास्तगी की तिथि से बहाली तक का -पूरा बकाया वेतन, सेवा लाभ और वरिष्ठता (सीनियरिटी)- भी प्रदान की जाए।
इस फैसले को दिव्यांग कर्मचारियों के अधिकारों और समान अवसर के सिद्धांत को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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