October 19, 2026

जिले में 270 आजीविका डबरी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण, बदलेगी खेती की तस्वीर

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कलेक्टर की पहल से किसानों को मिलेगा अतिरिक्त सिंचाई का संबल
दलहन-तिलहन और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी सशक्त


मुंगेली,  जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए जिला प्रशासन मुंगेली ने ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वीबीजी रामजी आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा के सतत मार्गदर्शन एवं कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में 270 आजीविका डबरी निर्माण कार्य

सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। यह पहल किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आजीविका डबरियों में वर्षा जल का वैज्ञानिक तरीके से संचयन किया जाएगा, जिससे खेतों में लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहेगा। इससे सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा तथा किसानों को वर्षभर कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।


कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार उपलब्ध कराना है। जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार, मत्स्य पालन और फसल विविधीकरण जैसे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये डबरियां वर्षा जल को संरक्षित कर उसे खेतों के समीप सुरक्षित रखेंगी। पहले जो पानी बहकर नालों और नदियों में चला जाता था, अब वही जल सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण तथा कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा तथा जल संकट से राहत मिलेगी। आजीविका डबरियों के माध्यम से किसान आवश्यकता पड़ने पर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। इससे सूखे की स्थिति में भी फसल सुरक्षित रहेगी, सब्जी एवं बागवानी का विस्तार होगा, कृषि लागत में कमी आएगी तथा उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। सिंचाई सुविधा मिलने से किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती भी कर सकेंगे।


डबरियों में उपलब्ध जल से दलहन एवं तिलहन फसलों को समय पर सिंचाई मिल सकेगी। इससे चना, मसूर, अरहर, मूंग, उड़द, सरसों, तिल सहित अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और प्राकृतिक जोखिम भी कम होगा। जिन डबरियों में वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा, वहां वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन भी किया जा सकेगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा, ग्रामीणों को पोषणयुक्त खाद्य उपलब्ध होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।


जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभाकर पाण्डेय ने कहा कि आने वाले समय में इन आजीविका डबरियों का समुचित रखरखाव एवं अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे जिले की कृषि व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा जल संरक्षण का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। डबरियों में संग्रहित वर्षा जल धीरे-धीरे भूमि में समाहित होकर भू-जल स्तर को बढ़ाने में सहायक होगा। इसका लाभ आसपास के कुओं, हैंडपंपों और बोरवेलों में भी जल उपलब्धता बढ़ने के रूप में मिलेगा। आजीविका डबरी जल संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर कृषि, टिकाऊ आजीविका और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बनेगी।

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