October 19, 2026

मानसून का दोहरा रंग: किसानों के खिले चेहरे, नगर पालिका की लापरवाही से शहर में ‘जलभराव और कीचड़’

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दो दिन की बारिश ने खोली नगर पालिका की तैयारियों की पोल, किसानों के चेहरे खिले तो शहरवासी हुए परेशान


मुंगेली – जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश ने जिले के किसानों के लिए राहत और खुशियों की सौगात लेकर आई है। पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश से खेतों में नमी पहुंचने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है और कृषि कार्यों में तेजी आ गई है। वहीं दूसरी ओर यही बारिश नगर क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई। शहर के कई वार्डों में जलभराव, कीचड़ और गंदगी ने नगर पालिका परिषद की बारिश पूर्व तैयारियों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है।
अमूमन हर वर्ष 15 जून के बाद से किसान खेतों की ओर रुख कर धान की बुआई और अन्य कृषि कार्य प्रारंभ कर देते हैं। लेकिन इस वर्ष मानसून की देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। बारिश समय पर नहीं होने से किसान लगभग 10 से 12 दिन पीछे हो गए थे। कई किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब लगातार दो दिनों से हुई बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आने लगी है, जिससे किसानों ने रोपा, जुताई और अन्य कृषि कार्य शुरू कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश होती रही तो फसल की स्थिति सामान्य हो सकती है।
वहीं नगर क्षेत्र की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। हल्की से मध्यम बारिश में ही शहर के कई वार्डों की सड़कें कीचड़ में तब्दील हो गईं। नालियों की समय पर सफाई नहीं होने से बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। कई मोहल्लों में घरों के सामने कीचड़ और गंदगी फैल गई, जिससे लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया। कई स्थानों पर जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश से पहले नगर पालिका द्वारा नालों और नालियों की सफाई तथा जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।

लेकिन पहली ही बारिश में इन दावों की हकीकत सामने आ जाती है। यदि समय रहते नालियों की सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की गई होती तो शहरवासियों को इस तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। कीचड़ और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका को केवल कागजी तैयारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए ताकि हर वर्ष बारिश में लोगों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। एक ओर जहां बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका की लापरवाही ने शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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