मारपीट और जातिगत गाली-गलौज मामले में एसपी से लगाई न्याय की गुहार
झूठी एफआईआर निरस्त करने, गंभीर धाराएं जोड़ने और सुरक्षा प्रदान करने की मांग
मुंगेली। जिले के जरहागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बिरगांव में मारपीट और जातिगत गाली-गलौज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक मुंगेली को आवेदन सौंपकर थाना जरहागांव में दर्ज अपराध क्रमांक 0095 की निष्पक्ष जांच कराने, कथित झूठी एफआईआर निरस्त करने तथा आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पीड़ित परिवार ने अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
सार्वजनिक नल विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में संतोष महिलांगे ने बताया कि 12 जून 2026 को गांव में सार्वजनिक नल तोड़े जाने की घटना हुई थी। इसी घटना के बाद 14 जून को गांव में इस मुद्दे को लेकर विवाद की स्थिति बनी। आवेदन के अनुसार, जब उन्होंने नल की मरम्मत कराने की बात कही तो विवाद अचानक उग्र हो गया।
पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान गांव के कुछ लोग उनके घर में घुस आए और उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।
जातिसूचक शब्दों के साथ की गई मारपीट का आरोप
आवेदन में संतोष महिलांगे ने आरोप लगाया है कि रंजीत साहू, दीपक साहू, गौरीशंकर साहू, सुनील साहू, सुरेन्द्र साहू, सूरज साहू, अभय साहू, शेखर साहू और राकेश साहू ने एक राय होकर लाठी-डंडों, लात-घूंसों से हमला किया। इस दौरान कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें अपमानित किया गया और गांव में नहीं रहने देने की धमकी दी गई।
पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से गंभीर हमला किया, जिससे उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं।
पुत्र पर भी हुआ जानलेवा हमला
घटना के दौरान संतोष महिलांगे का पुत्र प्रेम महिलांगे मौके पर पहुंचा। आवेदन के अनुसार उसने आरोपियों को जातिगत टिप्पणी करने से रोका और कहा कि व्यक्तिगत विवाद में जाति को बीच में नहीं लाना चाहिए। यह बात सुनकर आरोपी और उग्र हो गए।
आरोप है कि इसके बाद सभी आरोपियों ने प्रेम महिलांगे पर भी हमला कर दिया। हमले में उसके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि दोनों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है, जिसमें चोटों की गंभीरता स्पष्ट है।
पुलिस पर गंभीर धाराएं नहीं लगाने का आरोप
संतोष महिलांगे ने आवेदन में थाना जरहागांव पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने मामले की गंभीरता को कम करते हुए सामान्य एवं जमानती धाराओं में अपराध दर्ज किया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि चोटों की प्रकृति और जातिगत अपमान को देखते हुए मामले में कठोर धाराएं तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया जाना चाहिए था।
केस वापस लेने बनाया जा रहा दबाव
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। संतोष महिलांगे का आरोप है कि उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है।
पीड़ित के अनुसार आरोपियों द्वारा यह भी कहा गया कि यदि मामला वापस नहीं लिया गया तो उन्हें झूठे प्रकरण में फंसाया जाएगा। इस धमकी के बाद पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में जीवनयापन कर रहा है।
एसपी से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से अपराध क्रमांक 0095 की केस डायरी मंगाकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही चोटों के आधार पर गंभीर धाराएं जोड़ने, जातिगत गाली-गलौज के मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने तथा परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की अपील की गई है।

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