7 साल का इंतजार खत्म, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए खुला रास्ता
आस्था और भक्ति की प्रतीक कैलाश मानसरोवर यात्रा का शनिवार से विधिवत शुभारंभ होने जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं का पहला दल सिक्किम के ऐतिहासिक नाथू ला दर्रे से अपनी अलौकिक यात्रा का आरंभ करेगा। वैश्विक स्तर पर विख्यात इस पावन तीर्थयात्रा की पुन: शुरुआत से शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। तिब्बत स्थित पवित्र माउंट कैलाश और मानसरोवर झील के दर्शन के लिए जाने वाले इस मार्ग पर सुरक्षा और सुविधा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
तीर्थयात्रियों का विभाजन और प्रशासनिक सुरक्षा
इस वर्ष कुल 500 श्रद्धालुओं को नाथू ला मार्ग से यात्रा करने की अनुमति दी गई है, जिन्हें 50-50 के 10 अलग-अलग जत्थों में बांटा गया है। यात्रा के दौरान कुशल समन्वय, स्वास्थ्य देखभाल और आपातकालीन सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक दल के साथ एक संपर्क अधिकारी और एक योग्य चिकित्सा सहायक को अनिवार्य रूप से नियुक्त किया गया है। भारत और चीन की सीमाओं पर इमिग्रेशन और सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा यात्रियों की सुगम जांच के बाद उन्हें बसों के माध्यम से तिब्बत के याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा, जहां उनके रहने, भोजन और मुद्रा विनिमय (करेंसी एक्सचेंज) की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने सोशल मीडिया पर एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर सभी तीर्थयात्रियों का आत्मीय अभिनंदन किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, विदेश मंत्रालय और चीनी प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह यात्रा 20 जून को भारतीय सीमा से प्रस्थान कर रही है। तैयारियों को पुख्ता करने के लिए राजनयिक दल ने हाल ही में सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे जैसे प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स का दौरा कर लॉजिस्टिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की थी। दूतावास ने यात्रियों की सहायता के लिए आने वाले दिनों में और भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही है।
चार प्रमुख धर्मों की महाआस्था का केंद्र
कैलाश मानसरोवर सिर्फ सनातन धर्मावलंबियों के लिए ही नहीं, बल्कि बौद्ध, जैन और बॉन मत के अनुयायियों के लिए भी परम पूजनीय स्थल है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जहां माउंट कैलाश देवाधिदेव महादेव भगवान शिव का अलौकिक निवास स्थान है, वहीं मानसरोवर झील को सृष्टि के सबसे पवित्र जलाशयों में गिना जाता है। दुर्गम रास्तों और विपरीत मौसम के बावजूद, यह यात्रा देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं के लिए आंतरिक शांति, असीम सहनशक्ति और अनन्य भक्ति का एक ऐसा अनूठा आध्यात्मिक अनुभव है, जिसे वे अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार अवश्य जीना चाहते हैं।

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