October 19, 2026

सुशासन तिहार में गूंज सकता है अवैध निर्माण, अतिक्रमण और प्लॉटिंग का मुद्दा, 10 जून को शिकायत की तैयारी

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मुंगेली में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और प्लॉटिंग को लेकर बढ़ा विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

मुंगेली। जिले में इन दिनों अवैध निर्माण, कथित अतिक्रमण, बिना अनुमति भवन निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के मामलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। नगर पालिका द्वारा जारी नोटिस, रद्द की गई भवन निर्माण अनुज्ञा के बावजूद जारी निर्माण कार्य, शहीद के गांव पंडरभट्टा में कथित अवैध प्लॉटिंग और पुराना बस स्टैंड स्थित अपोलो फार्मेसी से जुड़े विवाद के बीच अब इन सभी मामलों की शिकायत 10 जून को आयोजित होने वाले सुशासन तिहार में किए जाने की तैयारी की जा रही है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे इन मामलों को सुशासन तिहार के मंच पर उठाएंगे। इसके लिए दस्तावेजों और शिकायतों का संकलन भी किया जा रहा है।

वार्ड 17 में बिना अनुमति निर्माण पर नोटिस

नगर पालिका परिषद मुंगेली ने तिलक वार्ड क्रमांक 17 निवासी अमित लाल को बिना अनुमति निर्माण किए जाने के आरोप में नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नगर पालिका का कहना है कि संबंधित निर्माण कार्य नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया गया है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में भूमि स्वामित्व, राजस्व अभिलेख, नक्शा एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की जानकारी कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों को भी भेजी गई है।

रद्द हुई अनुज्ञा, फिर भी जारी निर्माण

शहर के रायपुर रोड स्थित एक निर्माणाधीन भवन को लेकर भी विवाद लगातार बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने शिकायत मिलने के बाद भवन निर्माण अनुज्ञा को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि भवन निर्माण अनुमति रद्द हो चुकी है तो निर्माण कार्य तत्काल रोक दिया जाना चाहिए था। लोगों का कहना है कि आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण जारी रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यह मामला भी सुशासन तिहार में उठाए जाने की तैयारी की जा रही है।

शहीद के गांव में अवैध प्लॉटिंग का आरोप

वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत के गांव पंडरभट्टा में कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमतियों और वैधानिक प्रक्रियाओं के कृषि भूमि को प्लॉटों में परिवर्तित कर बिक्री की जा रही है।

नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में जमीन खरीदने वाले लोगों को कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले को भी सुशासन तिहार में प्रमुखता से उठाने की तैयारी चल रही है।

अपोलो फार्मेसी प्रकरण से उठे सवाल

पुराना बस स्टैंड स्थित अपोलो फार्मेसी से जुड़े कथित अतिक्रमण मामले ने भी शहर की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। शिकायत के बाद नगर पालिका और प्रशासन की संयुक्त टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची थी, लेकिन कार्रवाई शुरू होने से पहले विवाद की स्थिति बन गई और टीम बिना कार्रवाई किए लौट गई।

इसके बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। प्रशासन का कहना है कि भूमि अभिलेखों और सीमांकन से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुशासन तिहार में उठेंगे कई सवाल

सूत्रों के अनुसार 10 जून को आयोजित होने वाले सुशासन तिहार में नागरिक कई महत्वपूर्ण सवाल उठाने की तैयारी में हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह सवाल शामिल हैं कि—

– नियम विरुद्ध भवन निर्माण अनुज्ञा जारी कैसे हुई?
– अनुज्ञा रद्द होने के बाद भी निर्माण कार्य क्यों जारी है?
– अवैध प्लॉटिंग के मामलों में अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– नजूल भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई अधूरी क्यों रह गई?
– क्या सभी मामलों में समान रूप से कानून लागू किया जा रहा है?

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

शहर में इन मामलों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। नागरिकों का कहना है कि रायपुर और बिलासपुर सहित अन्य जिलों में अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है, ऐसे में मुंगेली में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब जिलेभर की निगाहें 10 जून को आयोजित होने वाले सुशासन तिहार पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यदि इन मामलों की शिकायतें दर्ज होती हैं तो प्रशासन को जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लानी होगी। इससे यह भी तय होगा कि अवैध निर्माण, अतिक्रमण और प्लॉटिंग के आरोपों पर आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।

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