October 19, 2026

कोलकाता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरी शादी से जन्मी संतान को भी पेंशन में पूरा हक

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कोलकाता। Kolkata High Court ने संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अवैध रिश्ते या बिना तलाक के की गई दूसरी शादी से जन्मी संतान को भी पिता की पेंशन पर पूरा अधिकार मिलेगा। अदालत का यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए अहम नजीर माना जा रहा है।

पहली पत्नी को छोड़ा, दूसरी शादी छिपाकर की

यह मामला Eastern Railway के एक गेटमैन से जुड़ा है। पहली पत्नी (50) ने अदालत में आरोप लगाया कि उसे मिर्गी की बीमारी होने के कारण पति ने उसे छोड़ दिया और बिना तलाक लिए दूसरी महिला से गुपचुप शादी कर ली।

महिला ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 को रिटायरमेंट के बाद पति ने अपनी सर्विस और पेंशन रिकॉर्ड से उसका और बेटे का नाम हटाकर दूसरी पत्नी और उनकी 15 वर्षीय बेटी का नाम दर्ज करा दिया।

रेलवे ने पेंशन बांटने का दिया था आदेश

पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2012 से पहले गुजारा भत्ता का मामला चल रहा था, जिसमें अदालत ने बेटे के लिए हर महीने 1000 रुपए देने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में पति ने भुगतान बंद कर दिया।

मामले की जांच के बाद रेलवे प्रशासन ने माना कि बिना तलाक दूसरी शादी अवैध है। ऐसे में पेंशन का आधा-आधा हिस्सा पहली पत्नी और दूसरी शादी से जन्मी बेटी को देने का निर्णय लिया गया था।

हाई कोर्ट का अंतिम फैसला

रेलवे के फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश Justice Krishna Rao ने कहा कि तलाक का कोई वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, इसलिए कानूनी रूप से पहली पत्नी ही पेंशन की मुख्य हकदार है।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी भले अवैध हो, लेकिन उससे जन्मी संतान को पिता की पेंशन पर पूरा अधिकार है।

क्या दिया आदेश

अदालत ने निर्देश दिया कि पेंशन और सर्विस रिकॉर्ड में पहली पत्नी के साथ-साथ दूसरी पत्नी की 15 वर्षीय बेटी का नाम भी शामिल किया जाए।

इस फैसले से साफ हो गया है कि कानून बच्चों के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देता है, भले ही उनके माता-पिता का संबंध कानूनी रूप से वैध हो या नहीं।

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