October 19, 2026

अवैध प्लाटिंग को बढ़ावा दे रही नगर पालिका…परिषद के प्रस्ताव पर उठे सवाल ? शासन को हो रही भारी राजस्व क्षति…

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मुंगेली। नगर पालिका परिषद मुंगेली की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अवैध प्लाटिंग और नियम विरुद्ध विकसित की जा रही कालोनियों में नगर पालिका मद से कार्य कराए जाने के प्रस्तावों ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि भूमाफियाओं और जमीन दलालों के हौसले भी बुलंद कर दिए हैं। ऐसे मामलों से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति होने की आशंका जताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल ही में दिनांक 10 दिसंबर 2025 को आयोजित नगर पालिका परिषद की बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हुई। परिषद की बैठक सूचना क्रमांक 3205/नगर पालिका/परिषद सम्मेलन/2025-26 मुंगेली, दिनांक 05 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव क्रमांक 57 की कंडिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि वार्ड क्रमांक 6 परमहंस वार्ड, मुंगेली में ए.आर.सी. स्कूल के पास ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने हेतु अध्यक्ष/पार्षद मद से भुगतान किए जाने एवं कार्य कराए जाने की अनुशंसा की गई थी।

यह प्रस्ताव अपने आप में नगर पालिका के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। जानकारों का कहना है कि जिस क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग या अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही हो, वहां नगर पालिका मद से किसी भी प्रकार का कार्य कराना नियमों के प्रतिकूल है। ऐसे निर्णयों से न केवल अवैध कॉलोनियों को वैधता का संकेत मिलता है, बल्कि भूमाफियाओं और अवैध प्लाटिंग करने वाले जमीन दलालों को भी खुला संरक्षण मिलने जैसा संदेश जाता है।

नियमों के अनुसार जब कोई कालोनाइज़र किसी भूमि पर प्लाटिंग करता है या कॉलोनी का विकास करता है, तो सड़क, बिजली, पानी, नाली, स्ट्रीट लाइट सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना उसी कालोनाइज़र की जिम्मेदारी होती है। इसके एवज में नगर पालिका को विकास शुल्क, ले-आउट स्वीकृति शुल्क एवं अन्य करों के रूप में राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन यदि नगर पालिका स्वयं अवैध प्लाटिंग और अवैध कॉलोनियों में कार्य कराती है, तो इससे शासन को भारी राजस्व क्षति होती है और नियमों की खुली अनदेखी भी होती है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे प्रस्तावों पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में अवैध कॉलोनियों की संख्या और अधिक बढ़ेगी, जिससे शहर की सुव्यवस्थित विकास योजना पूरी तरह प्रभावित होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और दोषियों पर कब कार्रवाई होती है।

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